देश में बिजली चोरी से संबन्धित कानूनी प्रावधान क्या हैं?

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भारत में बिजली यानि इलेक्ट्रिसिटी से संबन्धित सबसे महत्वपूर्ण कानून है भारतीय विद्युत अधिनियम (Indian Electricity Act), 2003। यह एक्ट बिजली के उत्पादन, ट्रांसमिशन और वितरण (production, transmission, distribution) से संबन्धित नियम और दिशा-निर्देशों के लिए प्रावधान करता है भले ही उपभोक्ता (consumer) की तरफ से हो या विद्युत देने वाली कंपनी या विभाग की तरफ से।    

संविधान के अनुसार विद्युत समवर्ती सूची (concurrent list) का विषय है। इसका अर्थ है कि इस पर केंद्र सरकार और राज्य सरकार दोनों ही कानून बना सकती है। इसलिए अलग-अलग राज्यों के कानून में थोड़े बहुत अंतर हो सकते हैं। पर 2003 का सेंट्रल एक्ट सामान्य रूप से सभी जगह थोड़े बहुत परिवर्तन के साथ लागू हैं।

आम व्यक्ति को बिजली संबंधी जो कुछ प्रमुख समस्याएँ होती हैं, उससे संबन्धित कानूनी प्रावधानों की बात आज इस आलेख में करते हैं।  

बिजली संबंधी अपराध कितने तरह के होते हैं?

1. वैध या अधिकृत (Authorized) तरीके से उपयोग करते समय सेवा शर्तों का उल्ल्ङ्घन, जैसे बिजली बिल समय पर नहीं देना। ऐसे मामले में जेल नहीं होता है बल्कि एक्ट के सेक्शन 56 के तहत बिजली का कनैक्शन काटा जा सकता है।

2. अवैध या अनधिकृत (Unauthorized) तरीके से बिजली उपयोग करना, जैसे बिजली की चोरी। इसके लिए जुर्माना और कारावास भी दिया जा सकता है।

अनधिकृत उपयोग को दो श्रेणी में रखा जा सकता है:

1. जहां दुराशय नहीं हो, ऐसे अपराध सेक्शन 126 में बताए गए हैं। कई बार गलती या लापरवाही से अधिकृत सीमा से अधिक बिजली खर्च हो जाता है, या एक श्रेणी में लाइसेन्स होता है लेकिन दूसरे श्रेणी का खर्च कर देते हैं। ऐसे केस में केवल जुर्माना लगता है।

2. जहां बेईमानी (dishonest intention) हो, ऐसे अपराध सेक्शन 135 में बताए गए हैं, जैसे बिजली की चोरी। ऐसे अपराधों के लिए जुर्माना के साथ-साथ करवास भी हो सकता है।

बिजली की चोरी को भी दो वर्गों में रखा जा सकता है:

बिजली की चोरी, और

बिजली के उत्पादन, संवहन (transmission), एवं वितरण में लगे उपकरणों की चोरी, जैसे तार चुरा लेना।

कुछ श्रेणी के बिजली चोरी कम गंभीर यानि असंज्ञेय (non cognizable) माना जाता है जबकि कुछ श्रेणी के अधिक गंभीर यानि संज्ञेय (cognizable) माना जाता है। संज्ञेय का अर्थ होता है ऐसे केस में पुलिस बिना कोर्ट की अनुमति से गिरफ्तार कर सकती है। ऐसे गंभीर केस साधारणतः गैर जमानती होते हैं यानि ऐसे केस में जमानत केवल कोर्ट दे सकता है। पहला कैटेगरी सेक्शन 126 के तहत आता है दूसरा सेक्शन 135 के तहत। हालांकि जुर्माना की रकम की गणना करने का तरीका दोनों में एक जैसा ही होता है पर पहले में पुलिस कार्यवाई नहीं होती है जबकि दूसरे में हो सकती है।     

बिजली चोरी क्या है? (सेक्शन 135)

मोटे तौर पर इन स्थितियों में कहा जा सकता है कि बिजली चोरी हुई है:

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1. अगर कोई व्यक्ति बिजली कंपनी/विभाग के किसी केबल या तार से बिना अनुमति कनैक्शन बनाता है। यह केबल या तार ओवरहेड, भूमिगत अथवा पानी के नीचे हो सकता है। व्यक्ति के तहत कोई भी उपभोक्ता (consumer) हो सकता है जैसे कंपनी।  

 2. बिजली मीटर, ट्रांसफार्मर, लूप कनैक्शन या किसी अन्य उपकरण में कोई फेरबदल इसलिए करता है ताकि बिजली के उपयोग का रिकॉर्ड बदल जाय। उदाहरण के लिए कुछ लोग चुंबक का उपयोग करते हैं जिससे मीटर की रीडिंग बदल सकता है, या फिर बिजली के कुछ उपकरणों को मीटर को बायपास कर उपयोग में लाते हैं हालांकि उनके घर वैध कनैक्शन और मीटर होते हैं।  

3. बिजली के मीटर, या कोई अन्य उपकरण, या तार को तोड़ता, काटता या नुकसान पहुंचाता है जिससे बिजली के खपत का सही हिसाब रखने में रुकावट आती है।

4. जिस काम के लिए, या जितनी मात्रा में उपयोग करने के लिए उसे बिजली का कनैक्शन मिला है, उससे अलग या अधिक उपयोग करता है; उदाहरण के लिए, घरेलू कनैक्शन पर कमर्शियल उपयोग करता है,  

5. जिस जगह के लिए कनैक्शन की अनुमति मिला है उससे अलग जगह पर उपयोग करना भी चोरी माना जाता है। एक परिसर (campus) के अंतर्गत आने वाला यूनिट एक ही माना जाएगा जैसे घर के अंतर्गत रूम, किचन, स्टोर, वाशरूम, स्ट्रीट लाइट आदि भी आ जाएगा बशर्ते वह स्वीकृत लोड लिमिट के 20% से ज्यादा नहीं हो। लेकिन अगर आसपास के किसी दूसरे कैम्पस में कनैक्शन लिया जाता है तब उसके लिए अलग कनैक्शन और मीटर लेना होगा।

क्लियर है कि बिजली चोरी में केवल बिजली यानि करेंट का कनैक्शन लेना ही नहीं बल्कि उसके किसी उपकरण को अनधिकृत तरीके से लेना या उसमें परिवर्तन करना भी आता है।

भारतीय विद्युत अधिनियम, 2003 के तहत बिजली से संबन्धित मुख्य अपराध कौन से हैं?

1. बिजली की चोरी, जिसकी परिभाषा पहले बताया गया है। यह सेक्शन 135 के तहत अपराध है;

2. बिना वैध लाइसेन्स यानि अनुमति के बिजली का उपयोग करना। वैध स्वामी की अनुमति के बिना कनैक्शन लेना, या फिर कोई उपकरण या मीटर का उपयोग करना सेक्शन 136 के तहत उपराध बनाया गया है;

3. बिजली के आधारभूत संरचना (Electricity infrastructure) को नुकसान करना, जैसे सबस्टेशन, ट्रांसमिशन लाइन, डिस्ट्रिब्यूशन नेटवर्क को नुकसान पहुंचाना, तीसरी श्रेणी का अपराध है;

4. बिजली की बिक्री, खपत या डिस्ट्रिब्यूशन से संबन्धित धोखाधड़ी भी अपराध है। मीटर में ऐसे परिवर्तन करना जिससे रीडिंग गलत आए, इस कैटेगरी के अपराध हैं।

5. सेक्शन 136 कहता है कि ‘बेईमानी’ से बिजली विभाग की अनुमति के बिना बिजली का कोई उपकरण जैसे तार, पोल, ट्रांसफ़ोर्मर, मीटर आदि को एक जगह से दूसरी ले जाना अपराध है। इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि ले जाने वाले को इससे कोई फायदा हुआ है या नहीं।

6. सेक्शन 137 के अनुसार चुराए गए बिजली के सामानों को रखना या लेना भी दंडनीय अपराध है।

7. सेक्शन 138 के अनुसार बिजली विभाग के किसी उपकरण जैसे मीटर, आदि में कुछ भी फेरबदल करना, कुछ जोड़ना या हटाना आदि अपराध है। अगर किसी व्यक्ति का बिजली कनैक्शन विभाग द्वारा काट दिया गया है। लेकिन सभी उपकरण वैसे ही रखे हुए हैं, ऐसे में अगर वह मीटर, पोल, पीवीसी, टी जाइंट आदि किसी माध्यम से फिर से कनैक्ट कर लेता है तो वह इसी सेक्शन के तहत दोषी होगा।

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8. सेक्शन 139 लापरवाही से अपराध करने को दंडनीय बनाता है। उदाहरण के लिए, अगर कोई व्यक्ति लापरवाही से कोई ऐसा कार्य करता है जिससे मीटर, या बिजली आपूर्ति से संबन्धित किसी उपकरण को नुकसान होता है, या बिजली की बरबादी होती है, तो वह इस सेक्शन के तहत दंड का भागी होगा। पहले के सेक्शन जहां बेईमानी (dishonest intention) की बात करते हैं वहीं यह लापरवाही की बात करता है।

9. सेक्शन 140 भी मिलते जुलते कार्य को दंडनीय बनाता है जिससे बिजली बर्बाद हो, डायवर्ट हो, या फिर असम्बद्ध (disconnect) हो जाय। लेकिन यह कार्य लापरवाही से नहीं बल्कि दुर्भावना से की जाय। यह जरूरी नहीं है कि इससे करने वाले को लाभ हो। केवल कार्य का होना ही अपराध को पूरा कर देता है।   

एक्ट के तहत अपराधों के लिए दंड क्या है?

दंड के लिए अपराध के कैटेगरी के अलावा नुकसान की मात्रा, कार्य के पीछे के दुराशय, अपराध की आवृति आदि को भी आधार बनाया गया है। उदाहरण के लिए अगर कोई अगर कोई 10 किलोवाट से कम बिजली की चोरी करता है तो चोरी से प्राप्त रकम का कम से कम तीन गुना जुर्माना लिया जाएगा लेकिन यही अपराध दुबारा किया जाए तो जुर्माना चोरी की रकम से कम से कम छह गुना तक होगा।

चोरी अगर 10 किलोवाट से अधिक बिजली की हुई हो तो इसमें भी पहली बार चोरी से हुए फायदे का कम से कम तीन गुना और दूसरी या अधिक बार में कम से कम 3 गुना जुर्माना होगा। लेकिन इसमें जेल की सजा भी हो सकती है जो कि छह महीने से पाँच साल तक हो सकती है। इतना ही नहीं अपराधी को कुछ समय अवधि के लिए बिजली प्राप्त करने से रोक दिया जा सकता है। यह अवधि तीन महीने से दो साल तक की हो सकती है।  

क्या होता है जब बिजली चोरी में कोई व्यक्ति पकड़ा जाता है?

बिजली चोरी की शिकायत कोई भी व्यक्ति कर सकता है, जैसे जिस व्यक्ति से वैध कनैक्शन से लिया जा रहा हो, वह स्वयं या फिर कोई तीसरा पक्ष। कंपनी यानि सर्विस प्रोवाइडर चोरी का पता चलने पर बिना शिकायत के अपने आप भी कार्यवाई कर सकता है।

शिकायत या तो सर्विस प्रोवाइडर यानि कंपनी को दिया जा सकता है या फिर सीधे पुलिस को।

बिजली विभाग के कर्मचारी या पुलिस घटनास्थल पर जाकर शिकायत की जांच करती है और सबूत इकट्ठा करती है। जरूरत होने पर वे मीटर को जांच के लिए भी भेज सकते हैं।

शिकायत सही पाए जाने पर यानि यह साबित हो जाने पर कि बिजली की चोरी हुई है, पुलिस आरोपी के खिलाफ एफ़आईआर दर्ज कर सकती है। अगर छोटा केस हो तो कंपनी अपने स्तर पर जुर्माना लगा सकती है। अगर एफ़आईआर हुआ हो तो अन्य आपराधिक मामले की तरह कोर्ट में केस चलेगा और अपराध साबित होने के बाद कानूनी रूप से निर्धारित सजा दिया जाएगा। सजा जुर्माना, कारावास या फिर दोनों हो सकता है। अगर अपराध गैर जमानतीय हो तो ट्रायल के दौरान कोर्ट से जमानत लेना होगा।   

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अगर गलत बिल आ रहा हो तो क्या करें?

कई बार उपभोक्ता की शिकायत होती है कि उनका बिल खपत से अधिक आ रहा है। ऐसा कई बार तकनीकी खराबी की वजह से हो सकता है। यह भी हो सकता है कि मीटर रीडिंग लेने वाला स्टाफ गलत रीडिंग लिख ले, हालांकि इलेक्ट्रिक मीटर से ऐसी समस्या कम हुई है। कुछ मामले ऐसे भी देखने में आते हैं कि कोई अन्य व्यक्ति चुरा कर कनैक्शन ले रहा हो जिससे बिल ज्यादा आ जाता है। कारण खोज कर अपनी शिकायत लिखित में, सबसे पहले बिजली कंपनी या विभाग को देना चाहिए। अगर फिर भी बात नहीं बने तो पुलिस में जा सकते हैं।

उपभोक्ता के परेशान होने की एक और स्थिति हो सकती है जब बिजली कंपनी आप पर कोई ऐसा आरोप लगा रही हो जो आपके अनुसार सही नहीं है। जैसे गलत आरोप में आपके बिजली का कनैक्शन काट देना। ऐसे में कोर्ट में जाया जा सकता है।

अगर आप बिजली चोरी के आरोपी हैं तो क्या करें?

अगर आप पर बिजली चोरी का आरोप है और आप जानते हैं कि यह आरोप सही है, तब अच्छा तो यही होगा कि कंपनी को जुर्माना देकर केस खत्म करा लिया जाय। अगर शुरुआत में समझौता  कर लेते हैं तो हो सकता है कंपनी कुछ रकम कम भी कर देती है। लोक अदालत में भी ऐसे छोटेमोटे केस निपट जाते हैं। लेकिन अगर एफ़आईआर हो गया हो तो आपके पास कानून और कोर्ट का ही सहारा है। चूंकि बिजली चोरी के कुछ मामले संज्ञेय (cognizable) और गैर जमानतीय (non bailable) होते हैं। ऐसे केस में जेल जाने से बचने के लिए अग्रिम जमानत (anticipatory bail) कोर्ट से लेने का प्रयास करें अगर ऐसा नहीं हो सके आप गिरफ्तार हो जाए तब तो फिर नियमित जमानत ही लेना पड़ेगा। हालांकि जेल जाने की नौबत बहुत ही गंभीर मामले में आती है जो सामान्य नहीं होता है।

बिजली चोरी की शिकायत कहाँ करें?

अगर आपके या किसी और के वैध कनैक्शन से कोई अन्य व्यक्ति बिजली की चोरी करता है तो आप इसके लिए शिकायत कर सकते हैं। शिकायत अपने क्षेत्र के बिजली विभाग में जाकर या उसके द्वारा दी गई हेल्पलाइन नंबर पर कॉल कर, या वैबसाइट पर दिया जा सकता है। अगर आप चाहे तो पुलिस के पास भी शिकायत दे सकते हैं। शिकायत लिखित में और जहां तक संभव हो सभी जरूरी डीटेल के साथ दे जैसे चोरी का स्थान, समय, तरीका आदि। फोटो, वीडियो आदि सबूत हो तो और भी अच्छा। एक बात और। अगर शिकायतकर्ता चाहे तो अपनी पहचान छुपा सकता है। इसलिए शिकायत देते समय वह यह इच्छा उस पर लिख दे और अधिकारी को बता भी दे।

बिजली से संबन्धित केस किस कोर्ट में होता है?

इसके लिए विशेष कोर्ट का प्रावधान है इसलिए विद्युत अधिनियम 2003 का सेक्शन 145 सिविल कोर्ट को बिजली के अनधिकृत उपयोग के केस जो कि सेक्शन 126 के तहत अपराध हैं के ट्रायल पर रोक लगाता है। इसी एक्ट का सेक्शन 151 बिजली चोरी के मामले में स्वतः संज्ञान लेने (suo moto) केस लेने पर रोक लगाता है। चूंकि स्पेशल कोर्ट का प्रावधान है इसके लिए इसलिए बिजली से संबन्धित केस उपभोक्ता फोरम (consumer forum) में नहीं चल सकते हैं। कुछ अधिकार स्वयं विभाग को दिए गए हैं। बिजली विभाग ऐसे शिकायतों को सुनने के लिए विशेष अधिकारी की नियुक्ति करता है।  

38 thoughts on “देश में बिजली चोरी से संबन्धित कानूनी प्रावधान क्या हैं?”
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