February 2024

संविदा का उन्मोचन: संविदा-भंग द्वारा (सेक्शन 73, 74, 75)-part 22

संविदा-भंग (breach of contract) संविदा-भंग (breach of contract) क्या होता है? संविदा-भंग का अर्थ होता है संविदा को तोड़ देना

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डॉक्ट्रिन ऑफ पार्ट परफॉर्मेंस और पिनल लॉ क्या है? (सेक्शन 53A)- part 21

आंशिक पालन का सिद्धांत (doctrine of part performance) क्या है? डॉक्ट्रिन ऑफ पार्ट परफॉर्मेंस का सामान्य आशय यह है कि

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संविदा का उन्मोचन-संविदा पालन द्वारा (सेक्शन 37- 67)-part 20

संविदा का पालन संविदा के उन्मोचन का सामान्य विधिक तरीका है। क्योंकि विधि द्वारा प्रवर्तनीयता ही एक वैध संविदा का

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समाश्रित संविदा क्या है? (सेक्शन 31-36)- part 19

समाश्रित संविदा (Contingent Contract) Indian Contract Act का सेक्शन 31 समाश्रित संविदा को परिभाषित करते हुए कहता है कि- “Contingent

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साधारण अपवाद: आवश्यकता और सहमति (IPC 81, 87-92)

साधारण अपवाद: आवश्यकता (Necessity) और सहमति (Consent) – IPC धारा 81 और 87-92

भारतीय दंड संहिता (IPC) के अध्याय 4 के तहत साधारण अपवादों में आवश्यकता (Necessity – Section 81, 92) और सहमति (Consent – Section 87-92) के कानूनी सिद्धांतों को विस्तार से समझें।

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शून्य संविदा और शून्यकरणीय संविदा क्या है? (सेक्शन 10, 14, 19A, 20, 23-30)- Part 18

शून्य और शून्यकरणीय संविदा शून्य और शून्यकरणीय संविदा ऐसी संविदाएँ हैं जो विधिक रूप से मान्य संविदा की सभी शर्तों को पूरा

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साधारण अपवाद: बाल्यपन और पागलपन (IPC 82-84)

साधारण अपवाद: बाल्यपन, पागलपन और मत्तता (IPC धारा 82 से 86)

भारतीय दंड संहिता (IPC) के अध्याय 4 के अंतर्गत बाल्यपन (Infancy), पागलपन (Insanity) और मत्तता (Intoxication) से जुड़े कानूनी प्रावधानों और आपराधिक आशय (Mens Rea) के सिद्धांतों को विस्तार से समझें।

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विधिपूर्ण विषयवस्तु और विधिपूर्ण प्रतिफल क्या है? (सेक्शन 23)- Part 17

विधिपूर्ण विषयवस्तु (lawful object) और विधिपूर्ण प्रतिफल (lawful consideration) विधिपूर्ण विषयवस्तु और विधिपूर्ण प्रतिफल किसी भी वैध संविदा के लिए अनिवार्य है। सेक्शन

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General Exceptions IPC

साधारण अपवाद: न्यायिक कार्य, दुर्घटना, तुच्छ अपराध और अवपीडन (IPC Sec 76-106)

भारतीय दंड संहिता (IPC) के अध्याय 4 के तहत साधारण अपवादों (General Exceptions)—न्यायिक कार्य, दुर्घटना, तुच्छ अपराध, संवाद और अवपीडन के कानूनी प्रावधानों को विस्तार से समझें।

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संविदा में भूल के विधिक परिणाम क्या हैं?- Part 16 (सेक्शन 20, 21, 22)

संविदा पर भूल (mistake) का प्रभाव    संविदा में भूल का प्रभाव निर्णायक होता है। The Indian Contract Act का सेक्शन 20, 21 और

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कपट और दुर्व्यप्देशन से प्राप्त सहमति का संविदा पर प्रभाव (सेक्शन 10, 13, 14, 17, 18, 19)- part 15

कपट और दुर्व्यप्देशन से अगर संविदा के लिए सहमति प्राप्त की जाती है, तो यह सहमति स्वतंत्र नहीं मानी जाती है और

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असम्यक प्रभाव का संविदा पर विधिक प्रभाव (केस लॉ के साथ)(सेक्शन 10, 13, 14, 16, 19A)- part 14

असम्यक प्रभाव क्या है? (What is undue influence) असम्यक प्रभाव का सामान्य आशय होता है अनुचित प्रभाव। अगर कोई व्यक्ति

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विकृतचित्त व्यक्ति से संविदा के विधिक परिणाम (सेक्शन 12, 68)- part 13

संविदा अधिनियम मे अनुसार विकृतचित्त व्यक्ति कौन है? विकृतचित्त व्यक्ति से संविदा विधि द्वारा मान्य नहीं होता है। क्योंकि संविदा

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अवयस्क से संविदा की कानूनी स्थिति- केस लॉ- part 12

वयस्क से संविदा अवयस्क से संविदा कानून की दृष्टि में मान्य नहीं है। सेक्शन 10 के अनुसार अवयस्क संविदा करने के लिए

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प्रत्यास्थापन का सिद्धांत और अवयस्क के साथ संविदा(सेक्शन 64, 65, 70)- Part 11

प्रत्यास्थापन का सिद्धांत (The Doctrine of Restitution) प्रत्यास्थापन का सिद्धांत का सामान्य आशय होता है उस लाभ का प्र्त्यावर्तन या

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संविदा के लिए स्वतंत्र सहमति क्या है?(सेक्शन 13-22)- Part 10

स्वतंत्र सहमति स्वतंत्र सहमति का अर्थ है ऐसी सहमति जिसमें ये पाँच कमियाँ न हो (सेक्शन 14)- प्रपीड़न, असम्यक प्रभाव,

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विबन्धन और प्रीविटी ऑफ कांट्रैक्ट : केस लॉ-भाग 9

प्रीविटी ऑफ कांट्रैक्ट अथवा संविदा का संबंध प्रीविटी ऑफ कांट्रैक्ट का अर्थ है जो संविदा के पक्षकार नहीं हैं वह

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प्रीविटी ऑफ कांट्रैक्ट और विबन्धन-भाग 8

प्रीविटी ऑफ कांट्रैक्ट अर्थात जो संविदा के पक्षकार नहीं हैं वह उसे लागू कराने के लिए न्यायालय में वाद नहीं

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प्रतिफल: वैध संविदा के लिए अनिवार्य तत्त्व-भाग 6

प्रतिफल एक वैध संविदा के लिए अनिवार्य घटक है। व्यवहार में बिना किसी प्रतिफल के अगर किसी को कोई वस्तु

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formation of contract

संविदा निर्माण:केस लॉ-भाग 5

संविदा का निर्माण एक पक्ष (प्रस्थापक offerer) द्वारा प्रस्थापन (offer) करना और इसकी संसूचना दूसरे पक्ष (offeree अर्थात जिसके प्रति प्रस्थापन

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