Author name: Babita Jha

अपराध शस्त्र के कुछ प्रमुख सिद्धांत या सूत्र (maxim)

अपराध शस्त्र के कुछ प्रमुख सिद्धांत या सूत्र (maxim)-part 1.4

actus non facit reum nisi mens sit rea         अर्थात मेरी इच्छा के विरूद्ध किया गया कार्य मेरा नहीं है। इसी आशय से दूसरी उक्ति निकलती है “actus me invito factus non est mens actus” । अर्थात किसी कार्य के दंडनीय होने के लिए इच्छित होना अनिवार्य है। इन दोनों सिद्धांत या

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आपराधिक दुराश्य-केस लॉ- part 1.3

आपराधिक दुराशय (mens rea) क्या है? आपराधिक कार्य को करने के पीछे के आशय या दुराशय को आपराधिक दुराशय या तकनीकी शब्द में मेंस रिया कहते हैं। इससे संबन्धित सिद्धान्त और कानून हम पिछले भाग में पढ़ चुके हैं। प्रस्तुत भाग में इससे संबन्धित कुछ लिडिंग केस को पढ़ रहे हैं। महाराष्ट्र राज्य बनाम मेयर

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आपराधिक दुराश्य- भाग 1.3

आपराधिक दुराशय (mens rea) क्या है? आपराधिक कार्य को करने के पीछे के आशय या दुराशय को आपराधिक दुराशय या तकनीकी शब्द में मेंस रिया कहते हैं। वर्तमान न्याय शस्त्र का यह सामान्य नियम यह है “कि कोई कार्य अपने आप मे अपराध नहीं होता है जब तक कि उसमे मेंस रिया यानि अपराध का

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संविदा के लिए संस्वीकृति, संसूचना,और प्रतिग्रहण: केस लॉ-part 4

केस लॉ संविदा के लिए संस्वीकृति, संसूचना,और प्रतिग्रहण (acceptance, communication and revocation of contract) के संबंध में विधिक प्रावधान (legal provisions) और कुछ महत्वपूर्ण केस लॉ हमने पहले भाग में पढ़ा था। इस संबंध में निम्नलिखित तीन केस लॉ भी अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। यूनियन ऑफ इंडिया वर्सेस मड्डाला थथाइयाह (Union of India v. Maddala Thathaiah) [AIR 1966

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अपराध किसे कहते हैं?-भाग 1.2

अपराध की परिभाषा आईपीसी मे ‘अपराध’ शब्द को परिभाषित नहीं किया गया है। जनरल क्लॉंजेज़ एक्ट, 1897 का सेक्शन 3 (38) अपराध (offence) को परिभाषित करते हुए केवल इतना कहता है कि: “कोई भी कार्य या लोप जो कि उस समय प्रवर्तित किसी कानून द्वारा दंडनीय बनाया गया हो (any act or omission made punishable by any law for

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संविदा की स्वीकृति, सूचना,और प्रतिग्रहण (केस लॉ के साथ)-part 3

क्या संविदा के प्रतिस्थापन के संस्वीकृति की संसूचना (Communication of Acceptance of offer) आवश्यक है?                   चूंकि ऑफर की स्वीकृति की संसूचना (communication) के बाद ही एक विधिक संविदा का गठन होता है। इसलिए यह आवश्यक है कि स्वीकृति (प्रतिग्रहण) करने वाला पक्ष प्रस्तावक को इस प्रतिग्रहण की सूचना

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संविदा निर्माण (केस लॉ के साथ)-part 2

संविदा निर्माण (formation of contract) संविदा निर्माण दो चरणों में होता है – दूसरे पक्ष द्वारा प्रस्थापना को अंतिम और स्पष्ट रूप से स्वीकार कर इसकी संसूचना (communication) पहले पक्ष को देने के साथ ही संविदा निर्माण हो जाता है। अर्थात यह एक विधि मान्य संविदा बन जाता है । इसके बाद अगर कोई पक्ष

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भारतीय दण्ड संहिता: सामान्य परिचय- भाग 1.1

भारतीय दण्ड संहिता (आईपीसी) क्या है?   भारतीय दंड संहिता जिसे इंग्लिश मे Indian Penal Code, और संक्षेप   में आईपीसी  कहते है, भारत की  मूल सारभूत आपराधिक विधि (substantive criminal law) है। सारभूत आपराधिक विधि  (substantive criminal law) का अर्थ होता है ऐसा कानून जो यह बताता है कि कौन सा कार्य अपराध होगा ।  अर्थात कौन-सा कार्य दंडनीय होगा और इस कार्य के लिए दंड

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संविदा क्या है- part 1

संविदा अधिनियम में संविदा की क्या परिभाषा दी गई है? भारतीय संविदा अधिनियम (the Indian Contract Act, 1872) के सेक्शन 2 (h) के अनुसार An agreement enforceable by law is a contract” (विधि द्वारा प्रवर्तनीय करार संविदा है।) इसका अर्थ यह हुआ कि संविदा एक समझौता है जिसमे एक विशेष तत्त्व “विधि द्वारा प्रवर्तनीयता” शामिल होती है।

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