Author name: Babita Jha

प्रीविटी ऑफ कांट्रैक्ट और विबन्धन-भाग 8

प्रीविटी ऑफ कांट्रैक्ट अर्थात जो संविदा के पक्षकार नहीं हैं वह उसे लागू कराने के लिए न्यायालय में वाद नहीं ला सकते हैं। लेकिन भारतीय संविदा अधिनियम s. 2 (b) इसका अपवाद देता है। संविदा का संबंध (privity of contract) क्या है?                   केवल वे व्यक्ति जो

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प्रतिफल: केस लॉ-भाग 7

प्रतिफल (consideration) एक वैध संविदा के लिए अनिवार्य तत्त्व है। इस के विषय में पिछले आलेख में हमने चर्चा की थी। अब हम प्रतिफल से संबंधित कुछ महत्वपूर्ण केस (leading cases) को देखते हैं।    प्रतिफल (consideration) संविदा अधिनियम की धारा 10 के अनुसार:           “सब करार संविदाएँ हैं, यदि वे संविदा करने के लिए सक्षम

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प्रतिफल: वैध संविदा के लिए अनिवार्य तत्त्व-भाग 6

प्रतिफल एक वैध संविदा के लिए अनिवार्य घटक है। व्यवहार में बिना किसी प्रतिफल के अगर किसी को कोई वस्तु या अधिकार दिया जाता है तो वह एकपक्षीय वचन होता है। ऐसा वचन दान या उपहार (gift) हो सकता है लेकिन संविदा नहीं। इससे किस विधिक अधिकार का सृजन नहीं होता है। प्रतिफल (consideration) क्या

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formation of contract

संविदा निर्माण:केस लॉ-भाग 5

संविदा का निर्माण एक पक्ष (प्रस्थापक offerer) द्वारा प्रस्थापन (offer) करना और इसकी संसूचना दूसरे पक्ष (offeree अर्थात जिसके प्रति प्रस्थापन किया गया है) को देना। Offeree द्वारा उसे स्पष्ट और अंतिम रूप से स्वीकार कर लिया जाना और इस संस्वीकृति की संसूचना पहले पक्ष (offerer) को देना। ये संविदा निर्माण के सामान्य चरण हैं। जिसके

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साधारण अपवाद: तथ्य की भूल- पार्ट 4.1

आईपीसी- अध्याय 4 भारतीय दण्ड संहिता का अध्याय 4 साधारण अपवादों का उपबंध करता है जो कि संहिता के तहत समस्त अपराधों पर लागू होता है। इसी संहिता का धारा 6 इस आशय का उपबंध करता है। धारा 6 के अनुसार: ‘‘इस संहिता में सर्वत्र, अपराध की हर परिभाषा, हर दण्ड उपबंध और हर ऐसी परिभाषा या दण्ड उपबंध

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आईपीसी में दण्ड से संबंधित प्रावधान- part 9

अध्याय 3- “दण्डों के विषय में” आईपीसी में दण्ड से संबंधित प्रावधान इसके चैप्टर 3 में दिए  गए हैं। आईपीसी यानि भारतीय दंड संहिता (Indian Penal Code) पाँच तरह के दण्ड का प्रावधान करती है। पूर्व में प्रचलित निर्वासन, सम्पूर्ण सम्पत्ति को अधिकृत करने और सार्वजनिक रूप से दण्ड देने का प्रावधान इसके द्वारा समाप्त

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अपराध के लिए सामूहिक दायित्व (केस लॉ)-part 2.3

सामूहिक दायित्व सामूहिक दायित्व का अर्थ है जब कई व्यक्ति मिल कर कोई अपराध करते हैं, तब उन में से प्रत्येक का उस अपराध के लिए दायित्व। यह संभव  है कि उन में से प्रत्येक का उस अपराध में भूमिका अलग-अलग हो या उनकी अलग-अलग भूमिका बहुत स्पष्ट न हो। इस स्थिति में उन सब

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अपराध के लिए सामूहिक दायित्व क्या है?-part 2.2

 सामूहिक दायित्व (Joint liablity) का सिद्धांत क्या है? अपराध के सामूहिक दायित्व का सिद्धांत, जो आईपीसी के s. 34, 120क और 149 में निहित है, कई लोगों द्वारा किए गए अपराध के लिए उनमें से प्रत्येक के लिए दायित्व निर्धारित करता है। अर्थात अपराध के सामूहिक दायित्व का सिद्धांत उस स्थिति में किसी अपराध के

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आईपीसी की प्रवर्तनीयता और न्यायाधिकार-part 1.5

आईपीसी की प्रवर्तनीयता (enforceability) आईपीसी की प्रवर्तनीयता आईपीसी का चैप्टर एक बताता है। जिस चैप्टर में 1 से 5 तक कुल पाँच धाराएँ (sections) है। ये धाराएँ इस संहिता की प्रवर्तनीयता (enforceability) या न्यायाधिकार (jurisdiction) के बारे मे बताते है। अर्थात इनसे यह पता चलता है कि यह संहिता किन विषयों, किन व्यक्तियों और किन

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