लोक स्वास्थ्य, क्षेम, सुविधा, शिष्टता और सदाचार पर प्रभाव डालने वाले अपराधों के विषय में- अध्याय 14
268. लोक न्यूसेंस 269. उपेक्षापूर्ण कार्य जिससे जीवन के लिए संकटपूर्ण रोग का संक्रमण फैलना सम्भाव्य हो 270. परिद्वेषपूर्ण कार्य
268. लोक न्यूसेंस 269. उपेक्षापूर्ण कार्य जिससे जीवन के लिए संकटपूर्ण रोग का संक्रमण फैलना सम्भाव्य हो 270. परिद्वेषपूर्ण कार्य
264. तोलने के लिए खोटे उपकरणों का कपटपूर्ण उपयोग265. खोटे बाट या माप का कपटपूर्वक उपयोग266. खोटे बाट या माप
बाटों और मापों से सम्बधित अपराधों के विषय में (सेक्शन 264-267)- अध्याय 13 Read More »
166. “सिक्का” की परिभाषा- सिक्का, तत्समय धन के रूप में उपयोग में लाई जा रही और इस प्रकार उपयोग में
166. मिथ्या साक्ष्य देना– जो कोई शपथ द्वारा या विधि के किसी अभिव्यक्त उपबन्ध द्वारा सत्य कथन करने के लिए
मिथ्या साक्ष्य और न्याय के विरूद्ध अपराधों के विषय में (सेक्शन 166-229क)- अध्याय 11 Read More »
लोक सेवकों के आदेश की अवहेलना को आईपीसी में दंडनीय बनाया गया है बशर्ते वह लोक सेवक वैसे आदेश देने
लोक सेवकों के विधिपूर्ण प्राधिकार के अवमान के विषय में- अध्याय 10 Read More »
अध्याय 9क: निर्वाचन सम्बन्धी अपराधों के विषय में 171क. “अभ्यर्थी”, “निर्वाचन अधिकार” परिभाषित 171ख. रिश्वत 171ग. निर्वाचनों में असम्यक् असर
161से 165क तक, निरसित166. लोक सेवक, जो किसी व्यक्ति को क्षति कारित करने के आशय से विधि की अवज्ञा करता
लोक सेवकों द्वारा या उनसे सम्बन्धित अपराधों के विषय में- अध्याय 10 Read More »
इस अध्यााय के बीस धाराओं में जिन अपराधों को शामिल किया गया है उन्हें चार वर्गों में रखा जा सकता
लोक प्रशांति के विरूद्ध अपराधों के विषय में-अध्याय8 Read More »
131. विद्रोह का दुष्प्रेरण या किसी सैनिक, नौ सैनिक, नौ सैनिक या वायु सैनिक को कर्तव्य से विचलित करने का
सेना, नौ सेना, वायु सेना से सम्बन्धित अपराधों के विषय में-अध्याय 7 Read More »
इनमें पाँच तरह के अपराधो के विषय में उपबंध हैं: 1. भारत सरकार के विरूद्ध युद्ध (धारा 121, 121क, 122,
यह अध्याय आपराधिक विधि (संशोधन) अधिनियम, 1913 द्वारा अस्तित्व में आया। यह भारतीय अपराध विधि में एक नए अपराध “आपराधिक
परिचय किसी भी अपराध में शामिल व्यक्ति इसमें कई तरह से भूमिका निभा सकते हैं। सहायक व्यक्तियों को दण्ड की
परिचय प्राइवेट-प्रतिरक्षा अर्थात शरीर और संपत्ति की रक्षा व्यक्ति की स्वाभाविक प्रवृति है। इसलिए कानून भी यह अधिकार देता है
प्राइवेट प्रतिरक्षा (private defence) (धारा 96-106)-part 4.5 Read More »
साधारण अपवाद का आशय है ऐसा अपवाद जो सामान्य या साधारण रूप से आईपीसी के सभी अपराधों के लिए लागू
साधारण अपवाद वाले आईपीसी से अध्याय 4 में जिन 12 प्रकार के अपवादों का उल्लेख है उनमें बाल्यपन, पागलपन और
साधारण अपवाद ऐसी स्थितियाँ होती हैं, जिसमें किया गया कार्य कोई आपराधिक दायित्व उत्पन्न नहीं करता है। क्योंकि कानून इसे
साधारण अपवाद: न्यायिक कार्य, दुर्घटना, तुच्छ अपराध, संवाद और अवपीडन (s 76- 106)-part 4.1 Read More »
आईपीसी- अध्याय 4 भारतीय दण्ड संहिता का अध्याय 4 साधारण अपवादों का उपबंध करता है जो कि संहिता के तहत समस्त अपराधों
अध्याय 3- “दण्डों के विषय में” आईपीसी में दण्ड से संबंधित प्रावधान इसके चैप्टर 3 में दिए गए हैं। आईपीसी
सामूहिक दायित्व सामूहिक दायित्व का अर्थ है जब कई व्यक्ति मिल कर कोई अपराध करते हैं, तब उन में से
सामूहिक दायित्व (Joint liablity) का सिद्धांत क्या है? अपराध के सामूहिक दायित्व का सिद्धांत, जो आईपीसी के s. 34, 120क
आईपीसी की प्रवर्तनीयता (enforceability) आईपीसी की प्रवर्तनीयता आईपीसी का चैप्टर एक बताता है। जिस चैप्टर में 1 से 5 तक
actus non facit reum nisi mens sit rea अर्थात मेरी इच्छा के विरूद्ध किया गया कार्य
अपराध शस्त्र के कुछ प्रमुख सिद्धांत या सूत्र (maxim)-part 1.4 Read More »
आपराधिक दुराशय (mens rea) क्या है? आपराधिक कार्य को करने के पीछे के आशय या दुराशय को आपराधिक दुराशय या
आपराधिक दुराशय (mens rea) क्या है? आपराधिक कार्य को करने के पीछे के आशय या दुराशय को आपराधिक दुराशय या
अपराध की परिभाषा आईपीसी मे ‘अपराध’ शब्द को परिभाषित नहीं किया गया है। जनरल क्लॉंजेज़ एक्ट, 1897 का सेक्शन 3 (38) अपराध (offence) को
भारतीय दण्ड संहिता (आईपीसी) क्या है? भारतीय दंड संहिता जिसे इंग्लिश मे Indian Penal Code, और संक्षेप में आईपीसी कहते है, भारत की मूल