प्रीविटी ऑफ कांट्रैक्ट और विबन्धन-भाग 8
प्रीविटी ऑफ कांट्रैक्ट अर्थात जो संविदा के पक्षकार नहीं हैं वह उसे लागू कराने के लिए न्यायालय में वाद नहीं ला सकते हैं। लेकिन...
प्रीविटी ऑफ कांट्रैक्ट अर्थात जो संविदा के पक्षकार नहीं हैं वह उसे लागू कराने के लिए न्यायालय में वाद नहीं ला सकते हैं। लेकिन...
प्रतिफल (consideration) एक वैध संविदा के लिए अनिवार्य तत्त्व है। इस के विषय में पिछले आलेख में हमने चर्चा की थी। अब हम प्रतिफल से संबंधित...
प्रतिफल एक वैध संविदा के लिए अनिवार्य घटक है। व्यवहार में बिना किसी प्रतिफल के अगर किसी को कोई वस्तु या अधिकार दिया जाता...
संविदा का निर्माण एक पक्ष (प्रस्थापक offerer) द्वारा प्रस्थापन (offer) करना और इसकी संसूचना दूसरे पक्ष (offeree अर्थात जिसके प्रति प्रस्थापन किया गया है) को...
Introduction A special Leave Petition (SLP) is a special power given by the Constitution to the Supreme Court to allow an aggrieved person to...
आईपीसी- अध्याय 4 भारतीय दण्ड संहिता का अध्याय 4 साधारण अपवादों का उपबंध करता है जो कि संहिता के तहत समस्त अपराधों पर लागू होता है।...
अध्याय 3- “दण्डों के विषय में” आईपीसी में दण्ड से संबंधित प्रावधान इसके चैप्टर 3 में दिए गए हैं। आईपीसी यानि भारतीय दंड संहिता...
सामूहिक दायित्व सामूहिक दायित्व का अर्थ है जब कई व्यक्ति मिल कर कोई अपराध करते हैं, तब उन में से प्रत्येक का उस अपराध...
सामूहिक दायित्व (Joint liablity) का सिद्धांत क्या है? अपराध के सामूहिक दायित्व का सिद्धांत, जो आईपीसी के s. 34, 120क और 149 में निहित...
आईपीसी की प्रवर्तनीयता (enforceability) आईपीसी की प्रवर्तनीयता आईपीसी का चैप्टर एक बताता है। जिस चैप्टर में 1 से 5 तक कुल पाँच धाराएँ (sections)...