लोक प्रशांति के विरूद्ध अपराधों के विषय में-अध्याय8

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इस अध्यााय के बीस धाराओं में जिन अपराधों को शामिल किया गया है उन्हें चार वर्गों में रखा जा सकता हैः

1. विधि विरूद्ध जमाव (unlawful assembly) (धारा 141 से 145 तक, धारा 149 से 151 और धारा 158)

2. बल्वा करना (rioting) (धारा 146 से 148 तक, धारा 152 से 156 तक)

3. दंगा (affray) (धारा 159 और 160)

4. भिन्न वर्गों के बीच शत्रुता को बढ़ावा देना (promoting enmity between different classes) (धारा 153क, 153कक, 153ख)

विधि विरूद्ध जमाव (Unlawful Assembly) (धारा 141-145, धारा 149-151, धारा 158)

विधिविरूद्ध जमाव का सदस्य होना  (धारा 141, 132, 143)
विधिविरूद्ध जमाव में घातक हथियारों के साथ शामिल होना (धारा 144)
बिखर जाने के आदेश के जानते हुए भी विधिविरूद्ध जमाव में शामिल बने रहना (धारा 157)
विधिविरूद्ध जमाव के लिये भाड़े पर व्यक्ति को लाना (धारा 150)
विधिविरूद्ध जमाव के भाड़े पर व्यक्ति को संश्रय देना (धारा 158)
विधिविरूद्ध जमाव का भाग बनने के लिये भाड़े पर जाना (धारा 158)

141. विधिविरूद्ध जमाव– पाँच से अधिक व्यक्तियों का जमाव “विधिविरूद्ध जमाव” कहा जाता है, यदि उन व्यक्तियों का जिनसे वह जमाव गठित हुआ हैए सामान्य उद्देश्य हो-

पहला- केन्द्रीय सरकार को, या किसी राज्य सरकार को, या संसद को, या किसी राज्य के विधान-मण्डल को या किसी लोक सेवक को, जबकि वह ऐसे लोक सेवक के विधिपूर्ण शक्ति का प्रयोग कर रहा हो, आपराधिक बल द्वारा, या आपराधिक बल के प्रदर्शन द्वारा आतंकित करना; अथवा

दूसरा- किसी विधि के, या किसी वैध आदेशिका के, निष्पादन का प्रतिरोध करना, अथवा

तीसरा- किसी रिष्टि या आपराधिक अतिचार या अन्य अपराध करना; अथवा

चौथा- किसी व्यक्ति पर आपराधिक बल द्वारा या आपराधिक बल के प्रदर्शन द्वारा, किसी संपत्ति का कब्जा लेना या अभिप्राप्त करना या किसी व्यक्ति को किसी मार्ग के अधिकार के उपभोग से, या जल का उपभोग करने के अधिकार या अन्य अमूर्त अधिकार से जिसका वह कब्जा रखता हो, या उपभोग करता हो, वंचित करना या किसी अधिकार या अनुमति अधिकार को प्रवर्तित करना, अथवा किसी अधिकार या अनुमति अधिकार को प्रवर्तित करना, अथवा

पाँचवाँ- आपराधिक बल द्वारा या आपराधिक बल के प्रदर्शन द्वारा, किसी व्यक्ति को वह करने के लिए, जिसे करने के लिए वह वैध रूप से आबद्ध न हो या उसका लोप करने के लिए, जिसे करने के लिए वह वैध रूप से हकदार हो, विवश करना।

स्पष्टीकरण- कोई जमाव, जो इकट्ठा होते समय विधिविरूद्ध नहीं था, बाद को विधिविरूद्ध जमाव हो सकेगा।

[इस धारा के तहत व्यक्तियों के जमाव को विधि­ विरूद्ध जमाव तभी माना जाएगा यदि-

1. पाँच या अधिक व्यक्तियों के जमाव हो;

2. उन सब का सामान्य उद्देश्य हो;

3. उन सब का सामान्य उद्देश्य आपराधिक बल के प्रयोग या इसके प्रदर्शन द्वारा निम्नलिखित में से किसी एक हो आतंकित करना हो-

  • केन्द्रीय सरकार को, या
  • राज्य सरकार को, या
  • संसद, या
  • किसी लोकसेवक को,

4. अथवा किसी विधि या विधिक आदेश के निष्पादन का प्रतिरोध करना हो;

5. अथवा रिष्टि या आपराधिक अतिचार या अन्य अपराध करना हो;

6. आपराधिक बल या इसके प्रदर्शन द्वारा-

  • किसी संपत्ति का कब्जा लेना हो;
  • किसी व्यक्ति को अमूर्त अधिकारों से वंचित करना हो;
  • किसी अधिकार या अनुमानित अधिकार को प्रवर्तित करना हो;

7. अथवा किसी व्यक्ति को आपराधिक बल या इसके प्रदर्शन द्वारा-

  • वह कार्य करने के लिए जिसे करने के लिए वह वैध रूप से आबद्ध है नहीं है; या
  • उस काय का लोप करने के लिए जिसे करने के लिए वह वैधरूप से हकदार हैए विवश करना हो।

 142.  विधिविरूद्ध जमाव का सदस्य होना– जो कोई उन तथ्यों से परिचित होते हुए, जो किसी जमाव को विधिविरूद्ध जमाव बनाते हैं, उस जमाव में साशय सम्मिलित होता है या उसमें बना रहता है, वह विधिविरूद्ध जमाव का सदस्य है, यह कहा जाता है।

143.   दण्ड– जो कोई विधिविरूद्ध जमाव का सदस्य होगा, वह दोनों में से किसी भाँति के कारावास से जिसकी अवधि छह मास तक की हो सकेगी, या जुर्माने सेए या दोनों से, दण्डित किया जाएगा।

144.   घातक आयुध से सज्जित होकर विधिविरूद्ध जमाव में सम्मिलित होना- जो कोई किसी घातक आयुध से, या किसी ऐसी चीज से, जिससे आक्रामक आयुध के रूप में उपयोग किए जाने पर मृत्यु कारित होनी सम्भाव्य है, सज्जित होते हुए किसी विधिविरूद्ध जमाव का सदस्य होगा, वह दोनों में से किसी भाँति के कारावास से, जिसकी अवधि दो वर्ष तक की हो सकेगी, या जुर्माने सेए या दोनों से, दण्डित किया जाएगा।

[इस धारा के तहत अपराध गठित करने के लिए निम्नलिखित अनिवार्य अवयव हैं-

  • कोई विधिविरूद्ध जमाव हो;
  • अभियुक्त ऐसे विधिविरूद्ध जमाव का सदस्य हो;
  • अभियुक्त आयुध से अथवा ऐसी किसी वस्तु से सज्जित हो जिसका प्रयोग आयुध के रूप में हो सकता हो और इससे मृत्यु कारित होना संभाव्य हो।]

145.   किसी विधिविरूद्ध जमाव में यह जानते हुए कि उसको बिखर जाने का समावेश दे दिया गया है, सम्मिलित होना या उसमें बने रहना– जो कोई किसी विरूद्ध जमाव में यह जानते हुए कि ऐसे विधि विरूद्ध जमाव को बिखर जाने का समादेश विधि द्वारा विहित प्रकार से दिया गया है, सम्मिलित होगा, या बना रहेगा, वह दोनों में से किसी भाँति के कारावास से, जिसकी अवधि दो वर्ष तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, या दोनों से, दण्डित किया जाएगा।

[इस धारा के तहत अपराध गठित करने के लिए निम्नलिखित अनिवार्य अवयव हैं-

  • कोई विधिविरूद्ध जमाव हो;
  • अभियुक्त इस विधिविरूद्ध जमाव का अंग हो अर्थात् उसके उद्देश्य समान हो;
  • ऐसे विधि विरूद्ध जमाव को बिखर जाने का आदेश विधि­विहित रूप से दे दिया गया हो;
  • अभियुक्त बिखर जाने के आदेश के बाद भी उस विधिविरूद्ध जमाव में बना रहा हो या उसके बाद उसका सदस्य बना हो;
  • अभियुक्त उसका सदस्य यह जानने के बावजूद बना हो या बना रहा हो कि इस जमाव को बिखर जाने का आदेश दे दिया गया है।]

149.   विधिविरूद्ध जमाव का हर सदस्यए सामान्य उद्देश्य को अग्रसर करने के लिए किए गए अपराध का दोषी- यदि विधिविरूद्ध जमाव के किसी सदस्य द्वारा उस जमाव के सामान्य उद्देश्य को अग्रसर करने में अपराध किया जाता है, या कोई ऐसा अपराध किया जाता है, जिसका किया जाना उस जमाव के सदस्य उस उद्देश्य को अग्रसर करने में सम्भाव्य जानते थे, तो हर व्यक्ति, जो उस अपराध के किए जाने के समय उस जमाव का सदस्य है, उस अपराध का दोषी होगा।

   [इस धारा के तहत अपराध गठित करने के लिए निम्नलिखित अनिवार्य अवयव हैं-

  • कोई विधिविरूद्ध जमाव हो;
  • अभियुक्त उस जमाव का सदस्य हो;
  • जमाव या उसके किसी सदस्य द्वारा कोई अपराध किया गया हो;
  • ऐसा अपराध जमाव के सामान्य उद्देश्य को अग्रसर करने में किया गया हो या ऐसा हो जिसका किया जाना जमाव का हर सदस्य सम्भाव्य जानता हो।]

150.   विधिविरूद्ध जमाव में सम्मिलित करने के लिए व्यक्तियों का भाड़े पर लेना या भाड़े पर लेने के प्रति मौनानुकूलता– जो कोई किसी व्यक्ति को किसी विधिविरूद्ध जमाव में सम्मिलित होने या उसका सदस्य बनने के लिए भाड़े पर लेगा, या वचनबद्ध या नियोजित करेगा या भाड़े पर लिए जाने या वचनबद्ध या नियोजित करने का संप्रवर्तन करेगा या उसके प्रति मौनानुकूल बना रहेगा, वह ऐसे विधिविरूद्ध जमाव के सदस्य के रूप में, और किसी ऐसे व्यक्ति द्वारा ऐसे विधिविरूद्ध जमाव के सदस्य के नाते ऐसे भाड़े पर लेने, वचनबद्ध या नियोजन के अनुसरण में किए गए किसी भी अपराध के लिए उसी प्रकार दण्डनीय होगा, मानो वह ऐसे विधिविरूद्ध जमाव का सदस्य रहा था या ऐसे अपराध उसने स्वयं किया था।

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[इस धारा के निम्नलिखित अवयव हैं-

अभियुक्त ने निम्नलिखित में से एक कार्य किया हो:

  • उसने किसी व्यक्ति को विधि­विरूद्ध जमाव का सदस्य बनने के लिए उसे भाड़े पर लिया या 
  • वचनबद्ध किया, या नियोजित किया था;
  • उसने ऐसे व्यक्ति को विधि विरूद्ध जमाव का सदस्य बनाने अथवा उसमें सम्मिलित करने के लिए भाड़े पर लेते समय या नियोजित करते समय अभिप्रेरित किया अथवा मौनानुमति व्यक्त किया।
  • भाड़े पर लिए गए व्यक्ति ने ऐसे भाड़े पर लेने या वचनबद्ध करने या नियोजित करने के अनुसरण में एक अपराध किया हो।

      यह धारा ऐसे व्यक्तियों को दण्डित करने का प्रावधान करता है जो न तो दुष्प्रेरक होते हैं और न ही भागीदार बल्कि ये विधि­विरूद्ध जमाव के सृजन में सहायता करते हैं। भाड़े पर लिया गया व्यक्ति भी अपने द्वारा कारित अपराध के लिए उसी प्रकार दण्डित होगा जिस तरह वह तब होता यदि वह विधि­विरूद्ध जमाव हो सदस्य रहा होता और उसने स्वयं अपराध किया होता।]

151.   पाँच या अधिक व्यक्तियों के जमाव को बिखर जाने का समादेश दिए जाने के पश्चात् उसमें जानते हुए सम्मिलित होना या बने रहना– जो कोई पाँच या अधिक व्यक्तियों के जमाव में, जिससे लोक शान्ति में विघ्न कारित होना सम्भाव्य हो, ऐसे जमाव को बिखर जाने का समादेश विधिपूर्वक दे दिए जाने परए जानते हुए सम्मिलित होगा या बना रहेगा, वह दोनों में से किसी भाँति के कारावास से, जिसकी अवधि छह मास तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, या दोनों से दण्डित किया जाएगा।

स्पष्टीकरण- यदि वह जमाव धारा 141 के अर्थ के अन्तर्गत विधि विरूद्ध जमाव हो तो अपराधी धारा 145 के अधीन दण्डनीय होगा।

[इस धारा के अनिवार्य अवयव हैं:

  • पाँच या अधिक व्यक्तियों का जमाव होय ;जमाव का विधि­विरूद्ध होना आवश्यक नहीं है लेकिन इससे लोक­शान्ति भंग किए जाने की सम्भावना हो।
  • विधिपूर्वक इस जमाव को भंग करने का आदेश दिया गया हो।
  • अभियुक्त को इस बात का ज्ञान हो कि इस जमाव द्वारा लोक शांति भंग होने की आशंका है और इसे बिखर जाने का आदेश दिया जा चुका है।
  • अभियुक्त ऐसा आदेश दिए जाने और उसके ज्ञान के बाद उस जमाव में सम्मिलित हुआ हो या उसमें बना रहा हो।]

154.   उस भूमि का स्वामी या अधिभोगी, जिस पर विधिविरूद्ध जमाव किया गया है– जब कभी कोई विधिविरूद्ध जमाव या बलवा हो, तब जिस भूमि पर ऐसा विधिविरूद्ध जमाव या बलवा किया जाए, उसका स्वामी या अधिभोगी और ऐसी भूमि में  हित रखने वाला या हित रखने का दावा करने वाला व्यक्ति एक हजार से अनधिक जुर्माने से दण्डनीय होगा, यदि वह या उसका अभिकर्ता या प्रबन्धक यह जानते हुए कि ऐसा अपराध किया जा रहा है या किया जा चुका है या इस बात का कारण रखते हुए कि ऐसे अपराध का किया जाना संभाव्य है, उस बात का किया जाना अपनी शक्ति-भर शीघ्रतम सूचना निकटतम पुलिस थाने के प्रधान ऑफिसर को न दे और उस दशा में, जिसमें कि उसे या उन्हें यह विश्वास करने का कारण हो कि यह लगभग किया ही जाने वाला है, अपनी शक्ति­भर सब विधिपूर्ण साधनों का उपयोग उसका निवारण करने के लिए नहीं करता या करते और उसके हो जाने पर अपनी शक्ति­भर सब विधिपूर्ण साधनों का उस विधिविरूद्ध जमाव को बिखरने या बलवे को दबाने के लिए उपयोग नहीं करता या करते।

157.   विधिविरूद्ध जमाव के लिए भाड़े पर लाए गए व्यक्तियों को संश्रय देना– जो कोई अपने अधिभोग या भारसाधन, या नियन्त्रण के अधीन किसी गृह या परिसर में किन्हीं व्यक्तियों को, यह जानते हुए कि वे व्यक्ति विधिविरूद्ध जमाव में सम्मिलित होने या सदस्य बनने के लिए भाड़े पर लाए गए, वचनबद्ध या नियोजित किए गए है या भाड़े पर लाए जाने, वचनबद्ध या नियोजित किए जाने वाले हैं, संश्रय देगा, आने देगा या सम्मिलित करेगा, वह दोनों में से किसी भाँति के कारावास से, जिसकी अवधि छह मास तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, या दानों से दण्डित किया जाएगा।

[इस धारा के तहत अपराध गठित होने के लिए अवयव-

  • अभियुक्त ने संश्रय दिया या आने दिया या सम्मिलित किया;
  • ऐसा संश्रय या सम्मिलन ऐसे गृह या परिसर में किया गया था जो अभियुक्त के नियंत्रण में था;
  • ऐसा संश्रय या सम्मिलन ऐसे व्यक्ति को दिया गया था जो विधि­विरूद्ध जमाव में सम्मिलित होने या सदस्य बनने के लिए भाड़े पर लाए गए, वचनबद्ध या नियोजित किए गए थे;
  • अभियुक्त यह जानता था कि यह व्यक्ति विधि­विरूद्ध जमाव में शामिल होने के लिए लाया गया था।]

158.   विधिविरूद्ध जमाव या बलवे में भाग लेने के लिए भाड़े पर जाना– जो कोई धारा 141 में विनिर्दिष्ट कार्यों में से किसी को करने के लिए या करने में सहायता देने के लिए वचनबद्ध होगा या प्रस्थापना करेगा, वह दोनों में से किसी भाँति के कारावास से जिसकी अवधि छह मास तक की हो सकेगी या जुर्माने से या दोनों से, दण्डित किया जाएगा।

 या सशस्त्र चलना- तथा जो कोई पूर्वोक्त प्रकार से वचनबद्ध होने पर या भाड़े पर लिए जाने पर, किसी घातक आयुध से या ऐसी किसी चीज से, जिससे आक्रामक आयुध के रूप में उपयोग किए जाने पर मृत्यु कारित होनी सम्भाव्य है, सज्जित होकर चलेगा या सज्जित होकर चलने के लिए वचनबद्ध होगा या अपनी प्रस्थापना करेगा, वह दोनों में से किसी भाँति के कारावास से, जिसकी अवधि दो वर्ष तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, या दोनों से, दण्डित किया जाएगा।

[इस धारा के तहत अपराध गठित होने के लिए अवयव-

  • अभियुक्त भाड़े पर किसी लाया गया था;
  • उसे लाने का उद्देश्य धारा 141 में अपराधों को कारित करने या उसमें सहायता देना था;

       यह धारा विधिविरूद्ध जमाव या बलवे में भाग लेने के लिए भाड़े पर जाने को दण्डनीय बनाती है। धारा के दूसरे भाग में आयुध से सज्जित होकर ऐसे भाग लेने से संबंधित है और उसके लिए अधिक कठोर दण्ड का उपबंध है।]

बल्वा करना (Rioting) (धारा 146-148, धारा 156)

घातक हथियारों के साथ बल्वा करना (धारा 148)
बल्वा रोकने में लोक सेवकों को अवरोधित करना (धारा 152)
जानबूझ कर बल्वा के लिये उत्प्रेरित करना (धारा 153)
बल्वा व्यक्ति का दायित्व, जिसके फायदे के लिये बल्वा किया जाता है (धारा 155)
उस स्वामी या अधिभोगी के अभिकर्ता का दायित्व जिसके फायदे के लिये बल्वा किया जाता है। (धारा 156)

146.   बल्वा करना- जब कभी विधिविरूद्ध जमाव द्वारा या उसके किसी सदस्य द्वारा ऐसे जमाव के सामान्य उद्देश्य को अग्रसर करने में बल या हिंसा का प्रयोग किया जाता है, तब ऐसे जमाव का हर सदस्य बल्वा करने के अपराध का दोषी होगा।

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[इस धारा के तहत अपराध गठित करने के लिए निम्नलिखित अनिवार्य अवयव हैं-

  • अभियुक्तों की संख्या पाँच या अधिक होनी चाहिए और वे विधि विरूद्ध जमाव की परिभाषा में आते हों;
  • सभी अभियुक्त एक ही सामान्य उद्देश्य से प्रेरित हों;
  • विधि जमाव द्वारा अथवा उसके किसी सदस्य द्वारा सामान्य उद्देश्य के अनुसरण में बलप्रदर्शन या हिंसा का कोई कार्य किया जाय।]

147.   बल्वा करने के लिए दण्ड- जो कोई बल्वा करने का दोषी होगा, वह दोनों में से किसी भाँति के कारावास से, जिसकी अवधि दो वर्ष तक हो सकेगी, या जुर्माने से, या दोनों से दण्डित किया जाएगा।

148.   घातक आयुध से सज्जित होकर बल्वा करना- जो कोई घातक आयुध से, या किसी ऐसी चीज से, जिससे आक्रामक आयुध के रूप में उपयोग करने पर मृत्यु कारित होनी सम्भाव्य हो, सज्जित होते हुए बल्वा करने का दोषी हो, वह दोनों में से किसी भाँति के कारावास से, जिसकी अवधि तीन वर्ष तक हो सकेगी, या जुर्माने से, या दोनों से दण्डित किया जाएगा।

[इस धारा के तहत अपराध गठित करने के लिए निम्नलिखित अनिवार्य अवयव हैं-

  • कोई विधिविरूद्ध जमाव हो;
  • अभियुक्त उस जमाव का सदस्य हो;
  • जमाव या उसके किसी सदस्य द्वारा बल्वा का अपराध किया गया हो;
  • ऐसा अपराध जमाव के सामान्य उद्देश्य को अग्रसर करने में किया गया हो या ऐसा हो जिसका किया जाना जमाव का हर सदस्य सम्भाव्य जानता हो;
  • ऐसा जमाव या उसका सदस्य आयुध से या ऐसी किसी वस्तु से जिसका आयुध के रूप में प्रयोग किया जा सकता हो या जिससे मृत्यु संभाव्य हो सकता होए सज्जित हो।]

152.   लोक सेवक जब बल्वे इत्यादि को दबा रहा हो, तब उस पर हमला करना या उसे बाधित करना- जो कोई ऐसे किसी लोक सेवक पर, जो विधिविरूद्ध जमाव को बिखरने का, या बल्वे या दंगे को दबाने का प्रयास ऐसे लोक सेवक के नाते अपने कर्तव्य के निर्वहन में कर रहा हो, हमला करेगा या उसको हमले की धमकी देगा या उसके काम में बाधा डालेगा या बाधा डालने का प्रयत्न करेगा या ऐसे लोक सेवक पर आपराधिक बल का प्रयोग करेगा या करने की धमकी देगा, या धमकी देने का प्रयत्न करेगा, वह दोनों में से किसी भाँति के कारावास से, जिसकी अवधि तीन वर्ष तक हो सकेगी, या जुर्माने से, या दोनों से दण्डित किया जाएगा।

[इस धारा के निम्नलिखित अवयव हैं-

  • एक विधि­विरूद्ध जमाव हो;
  • इस विधि­विरूद्ध जमाव को बिखेरने का प्रयास एक लोक­सेवक द्वारा किया जा रहा हो; लोक­सेवक द्वारा यह प्रयास उसके कर्तव्यों के निर्वहन में किया गया हो;
  • अभियुक्त ने लोक­सेवक के विरूद्ध निम्नलिखित में से कोई एक कार्य किया हो-

क. हमला किया हो या हमला करने का प्रयत्न किया हो;

ख. बाधित किया हो या बाधित करने का प्रयत्न किया हो;

ग. आपराधिक बल का प्रयोग किया हो या इसका प्रयोग किया हो।]

153.   बल्वा कराने के आशय से स्वैरिता से प्रकोपन देना- यदि बल्वा किया जाए- यदि बल्वा न किया जाए- जो कोई अवैध बात के करने द्वारा किसी व्यक्ति को परिद्वेष से या स्वैरिता से प्रकोपित इस आशय से या यह सम्भाव्य जानते हुए करेगा कि ऐसे प्रकोपन के परिणामस्वरूप बल्वे का अपराध किया जाएगा;

यदि ऐसे प्रकोपन के परिणामस्वरूप बल्वे का अपराध किया जाए तो वह दोनों में से किसी भाँति के कारावास से, जिसकी अवधि एक वर्ष तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, या दोनों से, और

यदि बल्वे का अपराध न किया जाए, तो वह दोनों में से किसी भाँति के कारावास से, जिसकी अवधि छह मास तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, या दोनों से दण्डित किया जाएगा।

158.   उस व्यक्ति का दायित्वए जिसके फायदे के लिए बलवा किया जाता है- जब कभी किसी ऐसे व्यक्ति के फायदे के लिए या उसकी ओर से बलवा किया जाए, जो किसी भूमि का जिसके विषय में ऐसा बलवा हो, स्वामी या अधिभोगी हो या जो ऐसी भूमि में या बल्वे को पैदा करने वाले किसी विवादग्रस्त विषय में कोई हित रखने का दावा करता हो या जो उससे कोई फायदा प्रतिगृहित कर या पा चुका हो, तब ऐसा व्यक्ति, जुर्माने से दण्डनीय होगा, यदि वह या उसका अभिकर्ता या प्रबन्धक इस बात का विश्वास रखने का कारण रखते हुए कि ऐसा बल्वा किया जाना सम्भाव्य था या कि जिस विधिविरूद्ध जमाव द्वारा ऐसा बलवा किया गया था, वह जमाव किया जाना सम्भाव्य था, अपनी शक्ति­भर सब विधिपूर्ण साधनों का ऐसे जमाव या बलवे का किया जाना निवारित करने के लिए और उसे दबाने और बिखरने में  लिए उपयोग नहीं करता या करते।

[इस धारा के निम्नलिखित अवयव हैं-

  • अभियुक्त उस भूमि का स्वामी या अधिभोगी हो जिसके विषय में ऐसा बल्वा हुआ हो;
  • वह ऐसी भूमि में या बलवा पैदा करने वाले विवादग्रस्त विषय में हित का कोई दावा करता हो, या ऐसा कोई लाभ प्रतिगृहित कर चुका हो;
  • अभियुक्त या उसके किसी एजेंट या प्रबन्धक के पास यह विश्वास करने का कारण था कि बलवा होना सम्भावित था, या ऐसे विधि­विरूद्ध जमाव का होना सम्भाव्य था;
  • अभियुक्त या उसके एजेंट या प्रबन्धक ने इस जमाव या बलवे को निवारित करने या उसे दबाने या बिखरने के लिए अपनी शक्ति­भर विधिपूर्ण साधनों द्वारा प्रयास नहीं किया।

धारा 154 के तहत भूमि के स्वामी को दण्ड का प्रावधान किया गया है यदि उसकी भूमि पर बलवा या विधिविरूद्ध जमाव किया जाता है। लेकिन धारा 155 केवल बलवा किये जाने से सम्बन्धित है, विधि­विरूद्ध जमाव से नहीं। यदि बलवा होने पर उस भूमि से लाभ उठाने वाले व्यक्ति के विरूद्ध यह धारा दण्ड का प्रावधान करती है। इस धारा के अन्तर्गत अपराध तभी कारित होना समझा जाएगा जब अपराध बलवा वास्तव में कारित हो चुका हो।]

159.   उस स्वामी या अधिभोगी के अभिकर्ता का दायित्व, जिसके फायदे के लिए बल्वा किया जाता है- जब कभी ऐसे व्यक्ति के फायदे के लिए या ऐसे व्यक्ति की ओर से बल्वा किया जाए, जो किसी भूमि काए जिसके विषय में ऐसा बल्वा होए स्वामी हो या अधिभोगी हो या जो ऐसी भूमि में या बल्वे को पैदा करने वाले किसी विवादग्रस्त विषय में कोई हित रखने का दावा करता हो या जो उससे कोई फायदा प्रतिग्रहित कर या पा चुका हो।

       तब उस व्यक्ति का अभिकर्ता या प्रबन्धक जुर्माने से दण्डनीय होगा, यदि ऐसा अभिकर्ता या प्रबन्धक या विश्वास करने का कारण रखते हुए कि ऐसे बल्वे का किया जाना सम्भाव्य था, या जिस विधिविरूद्ध जमाव द्वारा ऐसा बल्वा किया गया था उसका किया जाना सम्भाव्य था, अपनी शक्तिभर सब विधिपूर्ण साधनों का ऐसे बलवे या जमाव का किया जाना निवारित करने के लिए और उसको दबाने और बिखरने कि लिए उपयोग नहीं करता या करते।

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[यह उस अपराध के लिए भूस्वामी अथवा अधिभोगी के अभिकर्ता या प्रबन्धक को ऐसे किसी भी अपराध के लिए दण्डित करती है जिसके लिए भूस्वामी या अधिभोगी संहिता की धाराओं 154 तथा 155 के अन्तर्गत दण्डनीय होगा। इस धारा के तहत अपराध गठित होने के लिए अवयव हैं-

  • बलवा किसी व्यक्ति के लाभ के लिए या उसके तरफ से हुआ हो;
  • ऐसा व्यक्ति उस भूमि या स्वामी या अधिभोगी हो जिस पर या जिसके लिए बलवा हुआ हो;
  • ऐसा व्यक्ति उस भूमि पर या बलवा के लिए विवाद के मूल विषय पर कोई दावा रखता हो या उससे कोई लाभ प्राप्त किया हो;
  • अभियुक्त ऐसे व्यक्ति के अभिकर्ता या प्रबंधक के रूप में कार्य करता हो;
  • लेकिन अभियुक्त ने यथाशक्ति बलवा को रोकने, विधिविरूद्ध जमाव को रोकने या बिखेरने के लिए विधिसम्मत प्रयास नहीं किया;
  • अभियुक्त यह जानता था कि बलवा होने या विधि­विरूद्ध जमाव की सम्भावना थी।]
विधिविरूद्ध जमाव और बल्वा में तुलना
विधि विरूद्ध जमावबल्वा
विधिविरूद्ध जमाव के लिये निम्नलिखित अनिवार्य अवयव हैं- 1. पाँच या अधिक व्यक्तियों के जमाव हो; 2. उन सब का सामान्य उद्देश्य हो; 3. उन सब का सामान्य उद्देश्य आपराधिक बल के प्रयोग या इसके प्रदर्शन द्वारा निम्नलिखित में से किसी एक हो आतंकित करना हो- केन्द्रीय सरकार को, याराज्य सरकार को, यासंसद, या                        किसी लोकसेवक को, 4. अथवा किसी विधि या विधिक आदेश के निष्पादन का प्रतिरोध करना हो; 5. अथवा रिष्टि या आपराधिक अतिचार या अन्य अपराध करना हो; 6. आपराधिक बल या इसके प्रदर्शन द्वारा- किसी संपत्ति का कब्जा लेना हो;किसी व्यक्ति को अमूर्त अधिकारों से वंचित करना हो;किसी अधिकार या अनुमानित अधिकार को प्रवर्तित करना हो; 7. अथवा किसी व्यक्ति को आपराधिक बल या इसके प्रदर्शन द्वारा- वह कार्य करने के लिए जिसे करने के लिए वह वैध रूप से आबद्ध है नहीं है, याउस काय का लोप करने के लिए जिसे करने के लिए वह वैधरूप से हकदार है, विवश करना हो।  बल्वा के लिये निम्नलिखित अनिवार्य अवयव हैं- अभियुक्तों की संख्या पाँच या अधिक होनी चाहिए और वे विधि विरूद्ध जमाव की परिभाषा में आते हों;सभी अभियुक्त एक ही सामान्य उद्देश्य से प्रेरित हों;विधि जमाव द्वारा अथवा उसके किसी सदस्य द्वारा सामान्य उद्देश्य के अनुसरण में बलप्रदर्शन या हिंसा का कोई कार्य किया जाय।
उपरोक्त कार्य के सामान्य उद्देश्य से पाँच से अधिक व्यक्ति मिलते हैं तो वे विधिविरूद्ध जमाव कहलाते हैं।विधिविरूद्ध जमाव यदि अपने सामान्य उद्देश्य के प्राप्ति के लिये वास्तव में बल का प्रयोग करते हैं तो वह बल्वा बना जाता है। अर्थात् दोनों में अंतर केवल बल प्रयोग का होता है। अगर बिना बल प्रयोग के ही जमाव बिखर जाता है तो वह बल्वा नहीं होगा बल्कि विधिविरूद्ध जमाव ही रहेगा।

दंगा (affray) (धारा 159-160)

159. दंगा- “जब कि दो या अधिक व्यक्ति लोक स्थान में लड़कर लोक शांति में विघ्न डालते हैं, तब यह कहा जाता है कि वे दंगा करते है।”

[दंगा के लिए मूल अवयव-

  • दो या अधिक व्यक्तियों के बीच लड़ाई;
  • लड़ाई किसी सार्वजनिक स्थान पर हो;
  • उनकी लड़ाई से लोकशांति को व्यवधान पहुंचे।

160.   दंगा करने के लिए दण्ड– जो कोई दंगा करेगा वह दोनों में से किसी भाँति के कारावास से जिसकी अवधि एक मास तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, जो एक सौ रूपये तक का हो सकेगा, या दोनों से दण्डित किया जाएगा।

बल्वा और दंगा में अंतर
दंगा बल्वा
 दंगा किसी सार्वजनिक स्थान पर ही हो सकता हैलेकिन बलवा निजी स्थानों पर भी हो सकता है,
 दंगा का अपराध गठित होने के लिए दो या अधिक व्यक्ति होने चाहिएपर बलवा के लिए पाँच या अधिक व्यक्ति होना आवश्यक है।
 दंगा के लिये विधिविरूद्ध जमाव होना आवश्यक नहीं हैबल्वा के लिये विधिविरूद्ध जमाव होना आवश्यक है।
दंगा और प्रहार में  तुलना
दंगाप्रहार
अन्य व्यक्तियों में भय हो जाय कि बल प्रयोग और अशांति होने वाली है।अन्य व्यक्तियों में भय हो जाय कि बल प्रयोग होने वाला है।
दंगा सार्वजनिक स्थान पर किया गया विशेष प्रकार का प्रहार है।प्रहार में वास्तविक बल प्रयोग करना आवश्यक नहीं है बल्कि ऐसा संकेत या तैयारी हो जिससे देखने वाले को आशंका हो जाय कि बल प्रयोग होने वाला है।
यह सार्वजनिक स्थान पर किया जाता है।यह सार्वजनिक या निजी किसी स्थान पर किया जा सकता है।
दंगा लोक प्रशान्ति के विरूद्ध अपराध माना जाता है।जबकि प्रहार व्यक्ति के शरीर के विरूद्ध अपराध माना जाता है।

भिन्न वर्गों के बीच शत्रुता को बढ़ावा देना (Promoting enmity between different classes) (धारा 153क, 153कक, 153ख)

153क. धर्म, मूलवंश, जन्म स्थान, निवास स्थान, भाषा, इत्यादि के आधारों पर विभिन्न समूहों के बीच शत्रुता का संप्रवर्तन और सौहार्द बने रहने पर प्रतिकूल प्रभाव डालने वाले कार्य करना-

(1) जो कोई-

(क) बोले गए या लिखे गए शब्दों द्वारा या संकेतों द्वारा या दृश्यरूपणों द्वारा या अन्यथा विभिन्न धार्मिक मूलवंशीय या भाषाई या प्रादेशिक समूहों, जातियों या समुदायों के बीच असौहार्द अथवा शत्रुता, घृणा या वैमन्स्य की भावनाएँ, धर्म, मूलवंश, जन्म स्थान, निवास स्थान, भाषा, जाति या समुदाय के आधारों पर या अन्य किसी भी आधार पर संप्रवर्तित करेगा या संप्रवर्तित करने का प्रयत्न करेगा; अथवा

(ख) कोई ऐसा कार्य करेगा, जो विभिन्न धार्मिक, मूलवंशीय, भाषायी या प्रादेशिक समूहों या जातियों या समुदायों के बीच सौहार्द बने रहने पर प्रतिकूल प्रभाव डालने वाला है और जो लोक प्रशान्ति में विघ्न डालता है या जिससे उसमें विघ्न पड़ना सम्भाव्य हो; अथवा

(ग) कोई ऐसा अभ्यास, आन्दोलन, कवायद या अन्य वैसा की क्रियाकलाप इस आशय से संचालित करेगा कि ऐसे क्रियाकलाप में भाग लेने वाले व्यक्ति किसी धार्मिक, मूलवंशीय, भाषाई या प्रादेशिक समूह या जाति या समुदाय के विरूद्ध आपराधिक बल या हिंसा का प्रयोग करेंगे या प्रयोग करने के लिए प्रशिक्षित किए जाएंगे या यह सम्भाव्य जानते हुए संचालित करेगा कि ऐसे क्रियाकलाप में भाग लेने वाले व्यक्ति किसी धार्मिक, मूलवंशीय, भाषाई या प्रादेशिक समूह या जाति या समुदाय के विरूद्ध आपराधिक बल या हिंसा का प्रयोग करेंगे, या प्रयोग करने के लिए प्रशिक्षित किए जाएंगे अथवा ऐसे क्रियाकलाप में इस आशय से भाग लेगा कि किसी धार्मिक, मूलवंशीय, भाषाई या प्रादेशिक समूह या जाति या समुदाय के विरूद्ध हिंसा का प्रयोग करेंगे या प्रयोग करने के लिए प्रशिक्षित किया जाए या यह सम्भाव्य जानते हुए भाग लेगा कि ऐसे क्रियाकलाप में भाग लेने वाले व्यक्ति किसी धार्मिक, मूलवंशीय, भाषाई या प्रादेशिक समूह या जाति या समुदाय के विरूद्ध आपराधिक बल या हिंसा का प्रयोग करेंगे या प्रयोग करने के लिए प्रशिक्षित किए जाएँगे और ऐसे क्रियाकलाप से ऐसी धार्मिक, मूलवंशीय, भाषाई या प्रादेशिक समूह या जाति या समुदाय के सदस्यों के बीच, चाहे किसी भी कारण से, भय या संत्रास या असुरक्षा की भावना उत्पन्न होनी सम्भाव्य है;

वह कारावास से, जिसकी अवधि तीन वर्ष तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, या दोनों से, दण्डित किया जाएगा।

(2) पूजा के स्थान आदि में किया गया अपराध- जो कोई उपधारा (1) में विनिर्दिष्ट अपराध किसी पूजा के स्थान में या किसी जमाव में, जो किसी धार्मिक पूजा या धार्मिक कर्म करने में लगा हुआ होए करेगा, वह कारावास से जो पाँच वर्ष तक का हो सकेगा, दण्डित किया जाएगा और जुर्माने से भी दण्डनीय होगा।

153कक. किसी जुलूस में जानबूझकर आयुध ले जाने या किसी सामूहिक ड्रिल या सामूहिक प्रशिक्षण का आयुध सहित संचालन या आयोजन करना या उसमें भाग लेना– जो कोई किसी सार्वजनिक स्थान में, दण्ड प्रक्रिया संहिताए 1973 (1974 का 2) की धारा 144क के अधीन जारी की गई किसी लोक सूचना या किए गए किसी आदेश के उल्लंघन में किसी जुलूस में जानबूझ कर आयुध ले जाता है या सामूहिक ड्रिल या सामूहिक प्रशिक्षण का आयुध सहित जानबूझ कर संचालन या आयोजन करता है या उसमें भाग लेता है तो वह कारावास से, जिसकी अवधि छह मास तक की हो सकेगी और जुर्माने से, जो दो हजार रूपए तक का हो सकेगा, दण्डित किया जाएगा।

 स्पष्टीकरण- “आयुध” से अपराध या सुरक्षा के लिए हथियार के रूप में डिजाइन की गई या अपनाई गई किसी भी प्रकार की कोई वस्तु अभिप्रेत है और इसके अन्तर्गत अग्नि शस्त्र, नुकीली धार वाले हथियार, लाठी, डंडा और छड़ी भी है।

153ख. राष्ट्रीय अखण्डता पर प्रतिकूल प्रभाव डालने वाले लांछन-

(1) जो कोई बोले गए या लिखे गए शब्दों द्वारा या संकेतों द्वारा या दृश्यरूपणों द्वारा या अन्यथा-

(क) ऐसा कोई लांछन लगाएगा या प्रकाशित करेगा कि किसी वर्ग के व्यक्ति इस कारण से कि वे किसी धार्मिक, मूलवंशीय, भाषाई या प्रादेशिक समूह या जाति या समुदाय के सदस्य हैं, विधि द्वारा स्थापित भारत के संविधान के प्रति सच्ची श्रद्धा और निष्ठा नहीं रख सकते या भारत की प्रभुता और अखण्डता की मर्यादा नहीं बनाए रख सकते, अथवा

(ख) यह प्राख्यान करेगा, परामर्श देगा, सलाह देगा, प्रचार करेगा या प्रकाशित करेगा कि किसी वर्ग के व्यक्तियों को इस कारण से वे किसी धार्मिक, मूलवंशीय, भाषाई या प्रादेशिक समूह या जाति या समुदाय या सदस्य हैं। भारत के नागरिक के रूप में उनके अधिकार न दिए जायें या उन्हें उनसे वंचित किया जाए; अथवा

(ग) किसी वर्ग के व्यक्तियों की बाध्यता के सम्बन्ध में इस कारण कि वे किसी धार्मिक, मूलवंशीय, भाषाई या प्रादेशिक समूह या जाति या समुदाय के सदस्य है, कोई प्राख्यान करेगा, परामर्श देगा, अभिवाक् करेगा या अपील करेगा अथवा प्रकाशित करेगा और ऐसे प्राख्यान, परामर्श, अभिवाक् या अपील से ऐसे सदस्यों तथा अन्य व्यक्तियों के बीच असामंजस्य, अथवा शत्रुता या घृणा या वैमनस्य की भावनाएँ उत्पन्न होती हैं या उत्पन्न होनी सम्भाव्य है।

 वह कारावास से, जो तीन वर्ष तक हो सकेगा, या जुर्माने से, या दोनों से, दण्डित किया जाएगा।

(2) जो कोई उपधारा (1) में विनिर्दिष्ट कोई अपराध किसी उपासना स्थल में या धार्मिक उपासना अथवा धार्मिक कर्म करने में लगे हुए किसी जमाव में करेगा वह कारावास से, जो पाँच वर्ष तक का हो सकेगा, दण्डित किया जाएगा और जुर्माने से भी दण्डनीय होगा।

मूलवंश, भाषा, प्रदेश, जाति समूहों या समुदायों पर आधारित वर्ग) के बीच शत्रुता को बढ़ावा देनाधारा 153, 153कक, 153ख)
धाराअपराध का तरीकाअपराध का उद्देश्य या संभावना की जानकारी दण्डदण्ड को वर्द्धित करने वाला तत्व
153बोले या लिखे गये शब्द, संकेत, दृश्यरूपण या अन्यथा द्वारा उपरोक्त वर्गों में आपसी शत्रुता, घृणा या वैमनस्य फैलान के लिये। ऐसी भावनाएँ धर्म, मूलवंश, जन्मस्थान, निवासस्थान, भाषा, जाति या समुदाय के आधार पर करे।तीन वर्ष तक का कारावास या जुर्माना या दोनोंयदि यह अपराध पूजा के स्थान आदि में किया जाय तो दण्ड बढ़कर पाँच वर्ष तक जो कि जुर्माना सहित होगा, हो जाएगा।
किसी ऐसे कार्य द्वारा इन समुदायों के बीच सौहार्द पर प्रतिकूल प्रभाव डाले और लोक प्रशांति में विघ्न डाले या इसकी संभावना हों।
किसी अभ्यास, आंदोलन, कवायद या ऐसा ही अन्य क्रियाकलाप द्वारा ऐसा वह इस आशय से करेगा कि इन समूहों के विरूद्ध आपराधिक बल या हिंसा का (1) प्रयोग करे (2) प्रयोग के लिये प्रशिक्षित करे (3) प्रयोग या प्रयोग के लिये प्रशिक्षण की संभावना होऐसा वह इस ज्ञान या इस संभावना की ज्ञान के साथ करेगा कि इससे इन समूहों में भय या संत्रास या असुरक्षा की भावना उत्पन्न होती है या उत्पन्न होने की संभावना होती है
153कक जुलुस, सामूहिक कवायद या सामूहिक प्रशिक्षण में भाग लेना या उसका संचालन करना और ऐसा आयुध के साथ करना।ऐसा अभियुक्त जानबूझ कर करता हैछः माह तक कारावास और दो हजार रूपये तक जुर्माना 
153बोले या लिखे गये शब्द, संकेत या अन्यथा प्रकट करे कि किसी वर्ग विशेष का व्यक्ति भारत के संविधान के प्रति श्रद्धा और निष्ठा या उसके प्रभुता और अखण्डता की मर्यादा बनाए नहीं रख सकते क्योंकि वे किसी विशेष धर्म, मूलवंश, भाषा, प्रदेश या जाति समूह या समुदाय से हैं   कि किसी वर्ष विशेष के व्यक्ति भारत के नागरिक के रूप में अधिकारों से वंचित रखा जाय क्योंकि वे किसी विशेष धर्म, मूलवंश, भाषा, प्रदेश या जाति समूह या समुदाय से है   ताकि कोई ऐसा प्रख्यान, परामर्श, अभिवाक् या अपील हो जिससे किसी (धर्म, मूल, भाषा, प्रदेश, जाती, समुदाय आधारित) का अन्य व्यक्तियों के साथ असामंजस्य, शत्रुता, घृणा, वैमनस्य उत्पन्न हो।तीन वर्ष तक कारावास या जुर्माना या दोनों।यदि ये अपराध किसी उपासना.स्थल में ं या उपासना या धार्मिक कर्म करने में ं लगे हुए किसी जमाव  में  किया जाय तो दण्ड बढ़कर पाँच वर्ष और जुर्माना हो जाएगा।

27 thoughts on “लोक प्रशांति के विरूद्ध अपराधों के विषय में-अध्याय8”
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