Author name: Babita Jha

अभिकरण की संविदा क्या है? (अध्याय 10, सेक्शन 182-238)-part 25

क्या प्रीविटी ऑफ कांट्रैक्ट अभिकरण की संविदा पर लागू होता है? प्रीविटी ऑफ कांट्रैक्ट की अवधारण के अनुसार संविदा के पक्षकारों के बीच ऐसा संविदात्मक संबंध होता है कि वे एक-दूसरे के विरूद्ध वाद ला सकते है, लेकिन ऐसा कोई व्यक्ति जो संविदा का पक्ष नहीं हो उस संविदा के पालन के उसके भंग से

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सदृश-संविदा (Quasi Contract) क्या है? (सेक्शन 68-75)-part 24

सदृश-संविदाएँ (Quasi-Contract) भारतीय संविदा अधिनियम (the Indian Contract Act) के अध्याय 5 के सेक्शन 68 से 72 (chapter IV S. 68-72) में ऐसे स्थितियों के लिए प्रावधान है जहाँ यद्यपि दोनों पक्षो में कोई संविदा नहीं नहीं लेकिन विधिक सिद्धांत के कारण उसे संविदा की तरह ही माना जाता है इसलिए इन्हे संविदा नहीं बल्कि सदृश-संविदा (quasi-contract)

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संविदा का उन्मोचन- पालन की असंभव्यता और नवीयन द्वारा (सेक्शन 56, 62, 63)- part 23

संविदा का उन्मोचन संविदा का उन्मोचन उस स्थिति को कहते हैं जब संविदा का पालन आवश्यक नहीं रह जाए। संविदा का उन्मोचन (discharge of contract) संविदा के पालन या भंग के अतिरिक्त इसके असंभव हो जाने या फिर से एक नए संविदा अर्थात संविदा के नवीयन द्वारा भी हो सकता है। भारत और इंग्लैंड दोनों में

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संविदा का उन्मोचन: संविदा-भंग द्वारा (सेक्शन 73, 74, 75)-part 22

संविदा-भंग (breach of contract) संविदा-भंग (breach of contract) क्या होता है? संविदा-भंग का अर्थ होता है संविदा को तोड़ देना अर्थात इसको मानने यानि इसका पालन करने से मना कर देना। दो पक्षों के बीच विधि द्वारा विधि द्वारा प्रवर्तनीय वचन ही संविदा (contract) कहलाता है। दोनों पक्ष अपने वचनो का पालन करने के लिए विधि

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डॉक्ट्रिन ऑफ पार्ट परफॉर्मेंस और पिनल लॉ क्या है? (सेक्शन 53A)- part 21

आंशिक पालन का सिद्धांत (doctrine of part performance) क्या है? डॉक्ट्रिन ऑफ पार्ट परफॉर्मेंस का सामान्य आशय यह है कि किसी संविदा के आंशिक पालन से भी कुछ अधिकार उत्पन्न हो जाते हैं। यह सिद्धांत संपत्ति संबंधी मामलों में उपयोग में आता है जो कि संविदा का एक विशेष प्रकार होता है इसलिए यह सिद्धांत

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संविदा का उन्मोचन-संविदा पालन द्वारा (सेक्शन 37- 67)-part 20

संविदा का पालन संविदा के उन्मोचन का सामान्य विधिक तरीका है। क्योंकि विधि द्वारा प्रवर्तनीयता ही एक वैध संविदा का आधार है। संविदा के उन्मोचन (discharge of contract) एक विधिमान्य संविदा दोनों पक्ष के लिए बाध्यकारी होता है, लेकिन जब यह बाध्यकारी नहीं रह जाता है तब संविदा का उन्मोचन हुआ कहा जाता है। पक्षकार

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समाश्रित संविदा क्या है? (सेक्शन 31-36)- part 19

समाश्रित संविदा (Contingent Contract) Indian Contract Act का सेक्शन 31 समाश्रित संविदा को परिभाषित करते हुए कहता है कि- “Contingent contract” defined.—A “contingent contract is a contract to do or not to do something, if some event, collateral to such contract, does or does not happen.      Illustration A contract to pay B Rs.

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साधारण अपवाद: आवश्यकता, सहमति- part 4.4

साधारण अपवाद का आशय है ऐसा अपवाद जो सामान्य या साधारण रूप से आईपीसी के सभी अपराधों के लिए लागू होता हो, भले ही उस धारा में अलग से इसका उल्लेख हो या न हो (धारा 6)। ये आपराधिक दायित्व से बचाव प्रदान करते हैं। चैप्टर 4 में जिन साधारण अपवादों का उल्लेख है उनमें

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शून्य संविदा और शून्यकरणीय संविदा क्या है? (सेक्शन 10, 14, 19A, 20, 23-30)- Part 18

शून्य और शून्यकरणीय संविदा शून्य और शून्यकरणीय संविदा ऐसी संविदाएँ हैं जो विधिक रूप से मान्य संविदा की सभी शर्तों को पूरा नहीं करती। शून्य संविदा किसी विधिक अर्हता को पूरा नहीं कर पाने के कारण अपनेआप शून्य यानि अप्रभावी होती है। इससे किसी तरह के अधिकार या दायित्व नहीं उत्पन्न होते हैं। शून्य संविदा से भिन्न

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साधारण अपवाद: बाल्यपन, पागलपन, मत्तता-part 4.2

साधारण अपवाद वाले आईपीसी से अध्याय 4 में जिन 12 प्रकार के अपवादों का उल्लेख है उनमें बाल्यपन, पागलपन और मत्तता भी आते हैं। क्योंकि इस स्थिति में आपराधिक कार्य करने वाले का कोई आपराधिक आशय नहीं होता है।  बाल्यपन (infancy) (धारा 82-83) धारा 82- सात वर्ष से कम आयु के शिशु का कार्य- कोई बात

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