Author name: Babita Jha

विधिपूर्ण विषयवस्तु और विधिपूर्ण प्रतिफल क्या है? (सेक्शन 23)- Part 17

विधिपूर्ण विषयवस्तु (lawful object) और विधिपूर्ण प्रतिफल (lawful consideration) विधिपूर्ण विषयवस्तु और विधिपूर्ण प्रतिफल किसी भी वैध संविदा के लिए अनिवार्य है। सेक्शन 10 के अनुसार एक संविदा के विधिपूर्ण होने के लिए यह आवश्यक है कि इसका विषयवस्तु यानि उद्देश्य और प्रतिफल दोनों विधिपूर्ण हो। कौन से उद्देश्य और प्रतिफल विधिपूर्ण है यह सेक्शन 23 बताता है। सेक्शन 23 के

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साधारण अपवाद: न्यायिक कार्य, दुर्घटना, तुच्छ अपराध, संवाद और अवपीडन (s 76- 106)-part 4.1

साधारण अपवाद ऐसी स्थितियाँ होती हैं, जिसमें  किया गया कार्य कोई आपराधिक दायित्व उत्पन्न नहीं करता है। क्योंकि कानून इसे इसकी विशेष स्थितियों के कारण आपराधिक दायित्व से मुक्त मानता है।साधारण अपवादों का विवरण आईपीसी से चैप्टर 4 में सेक्शन 76 से 106 तक है। इस अध्याय में न्यायिक कार्य, दुर्घटना, तुच्छ अपराध, संवाद और

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संविदा में भूल के विधिक परिणाम क्या हैं?- Part 16 (सेक्शन 20, 21, 22)

संविदा पर भूल (mistake) का प्रभाव    संविदा में भूल का प्रभाव निर्णायक होता है। The Indian Contract Act का सेक्शन 20, 21 और 22 संविदा करने मे हुए भूलों के विधिक परिणामों से संबंधित है। सेक्शन 20 उस स्थिति के विषय में बताता है जब दोनों ही पक्षों से तथ्य संबंधी किसी भूल हुई हो। ऐसी संविदा शून्य (void)

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कपट और दुर्व्यप्देशन से प्राप्त सहमति का संविदा पर प्रभाव (सेक्शन 10, 13, 14, 17, 18, 19)- part 15

कपट और दुर्व्यप्देशन से अगर संविदा के लिए सहमति प्राप्त की जाती है, तो यह सहमति स्वतंत्र नहीं मानी जाती है और पीड़ित पक्ष के पास यह विकल्प होता है कि इस संविदा को कोर्ट द्वारा शून्य घोषित करवा ले। अर्थात ऐसी संविदा शून्यकरणीय होती है। कपट (Fraud) क्या है? इंडियन कॉन्ट्रैक्ट एक्ट का सेक्शन 17 कपट (Fraud) को

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असम्यक प्रभाव का संविदा पर विधिक प्रभाव (केस लॉ के साथ)(सेक्शन 10, 13, 14, 16, 19A)- part 14

असम्यक प्रभाव क्या है? (What is undue influence) असम्यक प्रभाव का सामान्य आशय होता है अनुचित प्रभाव। अगर कोई व्यक्ति किसी अन्य व्यक्ति के अनुचित या असम्यक प्रभाव के कारण संविदा के लिए अपनी सहमति देता है, तो यह सेक्शन 14 के अनुसार स्वतंत्र सहमति नहीं मानी जाती है। ऐसे सहमति देने वाले के पास

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विकृतचित्त व्यक्ति से संविदा के विधिक परिणाम (सेक्शन 12, 68)- part 13

संविदा अधिनियम मे अनुसार विकृतचित्त व्यक्ति कौन है? विकृतचित्त व्यक्ति से संविदा विधि द्वारा मान्य नहीं होता है। क्योंकि संविदा के लिए यह आवश्यक है कि दोनों पक्षों की सहमति हो और यह सहमति स्वतंत्र (free) हो। अर्थात केवल सहमति ही नहीं, बल्कि ऐसी सहमति हो जो उसके परिणामों और प्रभावों के विषय में सोचसमझ

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अवयस्क से संविदा की कानूनी स्थिति- केस लॉ- part 12

वयस्क से संविदा अवयस्क से संविदा कानून की दृष्टि में मान्य नहीं है। सेक्शन 10 के अनुसार अवयस्क संविदा करने के लिए सक्षम नहीं हैं। इसके पीछे सिद्धांत यह है कि अपरिपक्व मस्तिष्क के कारण अवयस्क अपने हानि-लाभ और किसी संविदा के प्रभाव को समझ नहीं सकता है। इसलिए उसके हित की रक्षा करना कानून का कर्तव्य

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प्रत्यास्थापन का सिद्धांत और अवयस्क के साथ संविदा(सेक्शन 64, 65, 70)- Part 11

प्रत्यास्थापन का सिद्धांत (The Doctrine of Restitution) प्रत्यास्थापन का सिद्धांत का सामान्य आशय होता है उस लाभ का प्र्त्यावर्तन या प्रस्थापन यानि वापस करना जिसे किस अवयस्क व्यक्ति ने संविदा से प्राप्त किया है। अवयस्क व्यक्ति चूँकि मानसिक रूप से इतना सक्षम नहीं होता है कि अपने द्वारा लिए गए कार्यों या निर्णयों के प्रभाव से सही

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संविदा के लिए स्वतंत्र सहमति क्या है?(सेक्शन 13-22)- Part 10

स्वतंत्र सहमति स्वतंत्र सहमति का अर्थ है ऐसी सहमति जिसमें ये पाँच कमियाँ न हो (सेक्शन 14)- प्रपीड़न, असम्यक प्रभाव, कपट, दुर्व्यपदेशन और भूल। स्वतंत्र सहमति (free consent) एक वैध संविदा के लिए अनिवार्य शर्त है (सेक्शन 10)। सेक्शन 13 से सेक्शन 22 तक सहमति और स्वतंत्र सहमति का विवरण है. सेक्शन प्रावधान   सेक्शन

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विबन्धन और प्रीविटी ऑफ कांट्रैक्ट : केस लॉ-भाग 9

प्रीविटी ऑफ कांट्रैक्ट अथवा संविदा का संबंध प्रीविटी ऑफ कांट्रैक्ट का अर्थ है जो संविदा के पक्षकार नहीं हैं वह उसे लागू कराने के लिए न्यायालय में वाद नहीं ला सकता है। लेकिन भारतीय संविदा अधिनियम s. 2 (b) इसका अपवाद देता है। वचन विबंधन (estoppel) वचन विबंधन का अर्थ होता है अपने वचन से बंध

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