अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) की ‘Crime in India’ रिपोर्ट बच्चों के खिलाफ हुए यौन अपराधों के लिए आँकड़े मुख्य रूप से पॉक्सो अधिनियम, 2012 (POCSO Act) के तहत दर्ज प्राथमिकी (FIR) से लेता है।
| वर्ष | पॉक्सो (POCSO) के तहत दर्ज कुल मामले | बच्चों के खिलाफ दर्ज कुल अपराधों में POCSO अपराधों का प्रतिशत |
| 2020 | 47,221 | 36.7% |
| 2021 | 53,874 | 36.1% |
| 2022 | 63,400 | 39.0% |
| 2023 | 67,694 | 38.2% |
| 2024 | 69,191 | 36.8% |
NCRB के नवीनतम विश्लेषण के अनुसार, लगभग 95% से अधिक मामलों में अपराध करने वाले आरोपी बच्चे के परिचित होते हैं (जैसे- परिवार के सदस्य, पड़ोसी, रिश्तेदार, या ऑनलाइन मित्र) । गंभीर यौन हमले (Penetrative Sexual Assault) के मामलों में लगभग 98% से अधिक पीड़िताएं किशोर उम्र (12 से 18 वर्ष) की होती हैं।
मुख्य कानूनी प्रावधान
- पॉक्सो अधिनियम, 2012 (POCSO Act) यानि ‘बच्चों का यौन अपराधों से संरक्षण अधिनियम’ (Protection of Children from Sexual Offences Act) – सबसे प्रमुख और विशेष कानून। 14 नवंबर 2012 को लागू किया गया था, जिसका मुख्य उद्देश्य 18 वर्ष से कम आयु के बच्चों को यौन उत्पीड़न, यौन हमले और बाल पोर्नोग्राफी जैसे अपराधों से सुरक्षा प्रदान करना है। यह कानून लड़के और लड़की— दोनों के लिए समान रूप से लागू होता है।
- भारतीय न्याय संहिता (BNS, 2023)-सामान्य आपराधिक कानून
| पॉक्सो अधिनियम, 2012 | ||
| अपराध का विवरण [संबन्धित धाराएँ] | न्यूनतम सजा | अधिकतम सजा / प्रावधान |
| यौन हमला (Penetrative Sexual Assault): बच्चे के साथ किसी भी प्रकार का यौन शोषण/बलात्कार। [धारा 3 एवं 4] | 20 वर्ष का कठोर कारावास | आजीवन कारावास (शेष प्राकृतिक जीवन के लिए) + जुर्माना |
| गंभीर यौन हमला (Aggravated Penetrative Sexual Assault): पुलिस, गार्जियन, रिश्तेदार, स्कूल स्टाफ या आपदा/ट्रस्ट की स्थिति में किया गया यौन हमला। [धारा 5 एवं 6] | 20 वर्ष का कठोर कारावास | आजीवन कारावास या मृत्युदंड (Death Penalty) + जुर्माना |
| यौन हमला बिना पेनिट्रेशन (Sexual Assault): यौन नीयत से बच्चे के अंगों को छूना या अनुचित स्पर्श। [धारा 7 एवं 8] | 3 वर्ष का कारावास | 5 वर्ष तक का कारावास + जुर्माना |
| गंभीर यौन हमला बिना पेनिट्रेशन (Aggravated Sexual Assault): किसी जिम्मेदार/भरोसेमंद व्यक्ति द्वारा अनुचित स्पर्श। [धारा 9 एवं 10] | 5 वर्ष का कठोर कारावास | 7 वर्ष का कारावास + जुर्माना |
| यौन उत्पीड़न (Sexual Harassment): यौन नीयत से अश्लील इशारे, बातें, पीछा करना या अंग-प्रदर्शन करना। [धारा 11 एवं 12] | 1 वर्ष तक का कारावास | 3 वर्ष का कारावास + जुर्माना |
| बाल पोर्नोग्राफी (Child Pornography): बच्चे की अश्लील सामग्री बनाना, रखना, शेयर करना या देखना। [धारा 13, 14 एवं 15] | 5 वर्ष तक का कारावास | बाल पोर्नोग्राफी (Child Pornography): बच्चे की अश्लील सामग्री बनाना, रखना, शेयर करना या देखना। |
| 16 वर्ष या 12 वर्ष से कम आयु की बच्चों से बलात्कार [65(1) एवं 65(2)] | 20 वर्ष (16 से कम) / 20 वर्ष (12 से कम) | आजीवन कारावास या मृत्युदंड |
बच्चों के खिलाफ यौन हिंसा होने या होने की आशंका होने पर क्या किया जाना चाहिए?

ऐसी स्थिति में तुरंत सुरक्षात्मक, कानूनी और चिकित्सकीय कदम उठाने चाहिए। पॉक्सो अधिनियम, 2012 (POCSO Act) के तहत ऐसे मामलों में समय पर रिपोर्ट करना अनिवार्य है।
1. तात्कालिक सुरक्षा और बच्चे की सहायता (Immediate Steps)
बच्चों में सुरक्षा की भावना दें- यदि बच्चा कोई शिकायत करे अथवा आपको स्वयं उसके व्यवहार और स्वभाव में परिवर्तन से कुछ संदिग्ध लगे, तो बच्चे पर विश्वास करें, शांत रह कर उसकी बातों को सुने। संदिग्ध वायक्ति या असुरक्षित माहौल से दूर किसी सुरक्षित स्थान में बच्चे को ले जाएँ।
2. चिकित्सकीय सहायता (Medical Care): अगर शारीरिक रूप से यौन हिंसा हुई है, तो बच्चे को तुरंत अस्पताल ले जाएं। डॉक्टर से MLC (Medicolegal Examination) कराने को कहें। यह बच्चे के इलाज और कानूनी सबूत जुटाने—दोनों के लिए अत्यंत आवश्यक है।
3. आपातकालीन हेल्पलाइन और रिपोर्टिंग (Helplines): घटना की तुरंत सूचना देने के लिए निम्नलिखित नंबरों पर संपर्क करें:
112 (राष्ट्रीय आपातकालीन नंबर): पुलिस एवं अन्य आपातकालीन सहायता के लिए।
1098 (चाइल्ड हेल्पलाइन): 24×7 उपलब्ध चाइल्डलाइन सेवा, जो तुरंत राहत और काउंसिलिंग प्रदान करती है।
4. कानूनी कार्रवाई (Legal Action under POCSO)
पुलिस या CWC को सूचित करें: पॉक्सो कानून की धारा 19 के अनुसार, यदि किसी को बच्चे के साथ यौन हिंसा होने की आशंका भी है, तो इसकी सूचना निकटतम पुलिस स्टेशन या विशेष किशोर पुलिस इकाई (SJPU) को देना कानूनी रूप से अनिवार्य है।
बाल कल्याण समिति (CWC-Child Welfare Committee): यह बच्चे की सुरक्षा, रहने की व्यवस्था (यदि आवश्यक हो) और कानूनी प्रक्रिया में सहायता प्रदान करती है। यह समिति किशोर न्याय (बच्चों की देखभाल और संरक्षण) अधिनियम, 2015 (Juvenile Justice Act, 2015) के तहत प्रत्येक जिले में गठित की जाती है। CWC जिले स्तर पर एक बेंच/न्यायालय की तरह काम करती है, जिसे देखभाल और सुरक्षा की आवश्यकता वाले बच्चों (Child in Need of Care and Protection) से संबंधित मामलों में निर्णय लेने का पूरा अधिकार होता है।
FIR दर्ज कराएं: पुलिस में प्राथमिकी दर्ज कराएं। पॉक्सो के तहत दर्ज मामलों में पुलिस अधिकारी सिविल ड्रेस में बच्चे का बयान उसके घर या उसकी पसंद के स्थान पर दर्ज करते हैं।
विवरण एवं साक्ष्य सुरक्षित रखें: घटना की तारीख, समय और विवरण नोट कर लें। सबूत (जैसे पहने हुए कपड़े) बिना धोए संभाल कर रखें।
पॉक्सो अधिनियम, 2012 के तहत ध्यान रखना चाहिए कि बच्चे का नाम, फोटो या पहचान सोशल मीडिया/मीडिया पर शेयर न करें क्योंकि यह अपराध है। जानकारी छिपाना पॉक्सो एक्ट की धारा 21 के तहत स्वयं एक अपराध है। इसलिए ऐसे अपराधों की तुरंत जानकारी देना भी अपराध है।




