यह सत्य है कि अगर कोई व्यक्ति अपनी कोई चीज हमें नहीं दे तो उसे नहीं लेना चाहिए। लेकिन क्या हो, अगर वह चीज किसी की नहीं हो अर्थात वह चीज उसके मालिक से खो गई हो? इस स्थिति में भी, उसे रखना सही नहीं है क्योंकि हो सकता है उसका मालिक उसे ढूंढ रहा हो, या उसके लिए वह बहुत जरूरी हो।
इसलिए भारत का कानून कहता है कि अगर कोई खोई हुई वस्तु हमें मिले तो यदि संभव हो तो उसे उसके मालिक तक पहुंचाने का प्रयास करना चाहिए। कुछ स्थितियों में रख सकते हैं पर क्या हैं इसके नियम? अगर किसी खोई वस्तु का बेईमानी से उपयोग कर लिया जाय, तो कुछ स्थितियों में जेल की सजा भी हो सकती है।

जिन स्थितियों में वस्तु का उपयोग करने के लिए पैसे या कुछ अन्य रूप में क्षतिपूर्ति देने पड़े उसे कानून की भाषा में ‘सिविल दायित्व (civil liability)’ कहते हैं। जिन स्थितियों में सजा भी मिल सकती है उसे‘आपराधिक दायित्व (criminal liability) कहते है।
देश में इन दोनों तरह के दायित्वों के लिए दो मुख्य कानून हैं:
सिविल कानून है: भारतीय अनुबंध अधिनियम, 1872 (इंडियन कांट्रैक्ट एक्ट, 1872)
क्रिमिनल कानून है: भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 (1 जुलाई 2024 से सारे देश में लागू। इससे पहले भारतीय दंड संहिता (Indian Penal Code- IPC) लागू थी। पुराने केसों में अब भी यही लागू होती है।)
| भारतीय अनुबंध अधिनियम, 1872 | |
| पाने वाले के दायित्व (धारा 71, 151, 154) | पाने वाले के अधिकार (धारा 168-169) |
| उस वस्तु के असली मालिक का पता लगाने का प्रयास करे;जब तक मालिक नहीं मिल जाता तब तक उस वस्तु की ठीक से देखभाल करे; उस वस्तु का अपने लिए उपयोग नहीं करे | अगर उस वस्तु के मालिक ने किसी इनाम की घोषणा की है तो उस इनाम को पाने का अधिकार (अगर नहीं की है तब नहीं माँग सकता है।)यदि उस वस्तु को सुरक्षित रखने, या उसके मालिक को खोजने में उसने कोई उचित खर्च किया है तो मालिक से उसे पाने का अधिकार;वह उस वस्तु को बेच सकता है यदि- (1) वस्तु का मालिक प्रयास करने पर भी नहीं मिले, (2) वस्तु खराब होने वाली हो; जैसे, फल, सब्जी आदि (3) यदि वस्तु की सुरक्षा या देखभाल का खर्च वस्तु के मूल्य के आधे से अधिक हो। |
| भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 (1 जुलाई 2024 से। इससे पहले भारतीय दंड संहिता (Indian Penal Code- IPC) | |
| अपराध का विवरण | सजा और जुर्माना |
| संपत्ति का आपराधिक दुर्विनियोजन (Criminal Misappropriation of Property): BNS, धारा 314 (IPC धारा 403) किसी की खोई हुई चीज़ मिलने पर बिना असली मालिक की तलाश किए या उसकी जानकारी होने के बावजूद वस्तु को अपने इस्तेमाल में लेना, अपने पास रख लेना या बेच देना, इस धारा में अपराध माना जाता है। | कारावास: 2 वर्ष तक की जेल, या जुर्माना,या दोनों |
| इस धारा में अपराध तभी बनेगा जब पाने वाले व्यक्ति ने असली मालिक को ढूँढने का अच्छे इरादे से पूरा प्रयास किया नहीं किया हो। अगर इसके बाद भी मालिक नहीं मिले तो केवल पड़ी हुई वस्तु उठाने से अपराध नहीं होगा। | |
खोई हुई वस्तु मिलने पर क्या करना चाहिए?
1. वस्तु संस्था के प्रमुख के पास या ऑफिस में जमा करा दें। जैसे विद्यालय में मिले हुए वस्तु को प्रिन्सिपल ऑफिस में या मेट्रो में मिली वस्तु को उस स्टेशन के ऑफिस में जमा करवा दें।
2. किसी सार्वजनिक स्थान, जैसे सड़क पर कोई कीमती चीज (जैसे मोबाइल, गहने, बैग आदि) मिले तो उसे निकटतम पुलिस स्टेशन में जमा करवा कर उसकी पावती (Receipt) लें।
3. लापता दर्ज कराएं: रेलवे स्टेशन या एयरपोर्ट पर मिला हो, तो वहां के Lost and Found विभाग या RPF/CISF को सौंपें।



