भारतीय संविधान में व्यक्ति की ‘गरिमा‘ (Human Dignity) को अत्यंत महत्त्व दिया गया है। सामान्य शब्दों में ‘गरिमा’(Dignity) का अर्थ है सम्मान से जीना। सर्वोच्च न्यायालय ने इसे इतना महत्वपूर्ण माना है कि इसे संविधान का ‘मौलिक ढाँचा’ घोषित किया यानि इसे संसद भी बदल नहीं सकती। गरिमा (Dignity) से संबंधित प्रमुख संवैधानिक प्रावधान निम्नलिखित हैं:
1. संविधान की प्रस्तावना (Preamble):
संविधान की प्रस्तावना में “व्यक्ति की गरिमा” को राष्ट्र के मुख्य उद्देश्यों में शामिल किया गया है:“व्यक्ति की गरिमा और राष्ट्र की एकता और अखंडता सुनिश्चित करने वाली बंधुता बढ़ाने के लिए…”
2. मौलिक अधिकार (Fundamental Rights)
अनुच्छेद 21 (प्राण और दैहिक स्वतंत्रता का अधिकार): यह अनुच्छेद प्रत्येक व्यक्ति को ‘जीवित रहने’ का अधिकार देता है। लेकिन सर्वोच्च न्यायालय ने Francis Coralie Mullin और कई अन्य ऐतिहासिक मामलों में स्पष्ट किया है कि “जीवन के अधिकार” के लिए केवल ‘जीवित रहना’ रहना ही पर्याप्त नहीं है बल्कि मानवीय गरिमा (Human Dignity) अर्थात सम्मान के साथ जीवित होना चाहिए।

अनुच्छेद 17 (अस्पृश्यता का अंत): छुआछूत का उन्मूलन नागरिकों की सामाजिक गरिमा और सम्मान की रक्षा के लिए किया गया एक महत्वपूर्ण प्रावधान है।
अनुच्छेद 23 (मानव के दुर्व्यापार और ज़बर्दस्ती श्रम कराने का प्रतिषेध): इंसानों की खरीद-फरोख्त (Human Trafficking), बेगार और ‘जबर्दस्ती काम करवाने (forced labour)’पर रोक लगाकर व्यक्ति की गरिमा की रक्षा करता है।
अनुच्छेद 14 और 15 (समानता और गैर-भेदभाव): किसी भी नागरिक के साथ उसकी जाति, धर्म, लिंग या जन्मस्थान के आधार पर भेदभाव न करना उनकी गरिमा को बनाए रखने का आधार है।
3. राज्य के नीति निदेशक तत्व (Directive Principles of State Policy – DPSP)
राज्य को नीतियां बनाते समय नागरिकों की गरिमा का ध्यान रखने के निर्देश दिए गए हैं:
अनुच्छेद 39(f): बच्चों को स्वतंत्र और गरिमापूर्ण वातावरण में स्वास्थ विकास के अवसर देना।
अनुच्छेद 42: काम की न्यायसंगत और मानवोचित दशाओं (Humane Conditions of Work) तथा प्रसूति सहायता का प्रबंध करना।
अनुच्छेद 43: सभी कर्मकारों (Workers) के लिए शिष्ट जीवन स्तर (Decent Standard of Life) और सामाजिक-सांस्कृतिक अवसर सुनिश्चित करना।
4. मौलिक कर्तव्य (Fundamental Duties)
अनुच्छेद 51A(e): नागरिकों का यह कर्तव्य है कि वे ऐसी सभी प्रथाओं का त्याग करें जो महिलाओं के सम्मान और गरिमा (Dignity of Women) के विरुद्ध हों।
इस तरह व्यक्ति की गरिमा अर्थात सम्मान को हमारे संविधान में एक अत्यंत ही महत्त्वपूर्ण स्थान दिया गया है। इसका इतना महत्त्व है कि सरकार या संसद भी इसे नहीं छीन सकता।
लेकिन इन मौलिक अधिकारों और कर्तव्यों को प्रयोग करते समय हमें हमेशा याद रखना चाहिए कि हमारे अधिकार किसी और के कर्तव्य होते हैं और किसी और के वैसे ही अधिकार हमारे लिए कर्तव्य।
इसलिए हमें ऐसा कोई कार्य नहीं करना चाहिए जिससे किसी दूसरे के सम्मान को ठेस पहुँचे। अगर कोई हमारे सम्मान को ठेस पहुंचाए तो उसका भी विरोध करना चाहिए।

