विकृतचित्त व्यक्ति (person of unsound mind) से संविदा विधि द्वारा मान्य नहीं होता है। क्योंकि संविदा के लिए यह आवश्यक है कि दोनों पक्षों की सहमति हो और यह सहमति स्वतंत्र (Free) हो। अर्थात केवल सहमति ही नहीं, बल्कि ऐसी सहमति हो जो उसके परिणामों और प्रभावों के विषय में सोच-समझकर दी गई हो।
लेकिन अस्वस्थ मस्तिष्क का व्यक्ति या अवयस्क व्यक्ति ऐसा करने में सक्षम नहीं हो सकता है। इसलिए विधि ऐसे व्यक्तियों को संविदा करने के लिए योग्य नहीं मानती है।
अगर ऐसे व्यक्ति संविदा कर लेते हैं तो वह विधि की दृष्टि में शून्य अर्थात संविदा नहीं माना जाता है। यानी ऐसे संविदा से किसी तरह के अधिकार या दायित्व उत्पन्न नहीं होते हैं।
इस संबंध में मुख्य रूप से दो तरह के प्रश्न उठते हैं:
- विकृतचित्त या अस्वस्थ मस्तिष्क का व्यक्ति किसे माना जाएगा; और
- अगर इनसे की गई संविदा के तहत दूसरा पक्ष कोई कार्य करता है और कुछ खर्च करता है, तो क्या उसे यह रकम वापस पाने का अधिकार है।
इन दोनों प्रश्नों के संबंध में विकृतचित्त व्यक्ति के विधिक प्रावधान मुख्य रूप से वैसे ही हैं जैसे अवयस्क से संविदा के लिए होते हैं।
अधिनियम की धारा 12 (Section 12) स्वस्थचित्त की परिभाषा देती है। यह परिभाषा वास्तव में स्वस्थचित्तता की अवधारणा को स्पष्ट करती है। यदि कोई व्यक्ति संविदा करने के समय:
- (1) संविदा को समझने, और
- (2) अपने हितों पर उसके प्रभावों को समझने के लिए सक्षम हो,
तो यह माना जाएगा कि वह संविदा के उद्देश्य के लिए स्वस्थचित्त है। यह चिकित्सीय (Medical) स्वस्थचित्तता से भिन्न होता है। यह हो सकता है कि संविदा से पहले या बाद में वह इसे समझने के लिए सक्षम न हो, लेकिन इसके लिए मर्मभूत समय (Crucial Time) संविदा करते समय का होता है।
विकृतचित्त व्यक्ति से संविदा आरंभ से ही शून्य (Void ab initio) होता है। इससे संबंधित प्रावधान अधिकांशतः वैसे ही हैं जैसे कि अवयस्क के होते हैं। धारा 68 के तहत आवश्यकता की वस्तुओं की पूर्ति के लिए उपलब्ध कराई गई वस्तुओं की कीमत ऐसे व्यक्ति की संपत्ति से वसूल की जा सकती है।

किन व्यक्तियों को कानून द्वारा संविदा करने के लिए अयोग्य माना जाता है (Persons Debarred by Law)?
- युद्ध के दौरान विदेशी शत्रु (Alien Enemies): अर्थात उस देश या देशों के नागरिक जिनके साथ युद्ध घोषित है। इस दौरान कोई नया कांट्रैक्ट नहीं हो सकता और अगर पहले से कोई कांट्रैक्ट है तो वह युद्ध घोषित रहते समय निलंबित (Suspend) रहता है या समाप्त (Dissolved) हो जाता है।
- विदेशी सार्वभौम (Foreign Sovereign): या किसी कूटनीतिक अधिकारी के साथ केंद्र सरकार की पूर्व अनुमति के बिना कांट्रैक्ट नहीं किया जा सकता है।
- कार्पोरेशन (Corporations): अपने मेमोरेंडम और विनियमों (Articles) द्वारा शासित होते हैं। वे इस तरह का कोई कांट्रैक्ट नहीं कर सकते जो पूर्णतः व्यक्तिगत प्रकृति का हो।
- दिवालिया व्यक्ति: जो व्यक्ति दिवालिया घोषित होने के कारण विधि द्वारा कांट्रैक्ट करने के लिए अयोग्य हो गए हों।
- अपराधी व्यक्ति: कोई सजा प्राप्त (Convicted) अपराधी जेल में रहने के दौरान कांट्रैक्ट नहीं कर सकता है, लेकिन अगर वह किसी भी कारण से (जैसे क्षमा मिलने, सजा पूरी कर लेने आदि) जेल के बाहर आ जाए तो कांट्रैक्ट कर सकता है।




